इस बार ऐसा लग रहा था कि भाजपा के सारे मुख्यमंत्रियों में सबसे ताकतवर बनकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उभरेंगे. जनादेश और जनाधर को उनकी दो सबसे बड़ी ताकतों के तौर पर पेश किया जाता है. यह सच है कि भाजपा के किसी दूसरे मुख्यमंत्री के पास न तो आदित्यनाथ की तरह जनादेश है और न ही जनाधार. लेकिन शिवराज सिंह चौहान अगर अब भी भाजपा के सबसे ताकतवर मुख्यमंत्री बने हुए हैं तो इसकी दो वजहें योगी आदित्यनाथ का छह पांच महीने का अप्रभावी कार्यकाल और भाजपा से बाहर उनकी अस्वीकार्यता है.

शिवराज ऐसी स्थिति में भी मजबूत बने हुए हैं जब कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश में किसानों का हिंसक आंदोलन खड़ा हुआ. मध्य प्रदेश में किसानी के कायापलट को ही शिवराज सिंह चौहान की सबसे बड़ी कामयाबी के तौर पर पेश किया जाता रहा है. कहा जाता रहा है कि अगर कृषि और उद्योग में संतुलन को देखना हो तो मध्य प्रदेश का प्रयोग देखें. लेकिन पिछले एक साल में यह गुब्बारा फूट गया.

इसके बावजूद शिवराज सिंह चौहान अपनी ताकत बरकरार रखे हुए हैं. पिछले साल की तरह इस साल भी वे देश के सबसे ताकतवर और प्रभावी मुख्यमंत्रियों की सत्याग्रह की सूची में चौथे नंबर पर ही हैं. पार्टी के अंदर उनकी ताकत योगी आदित्यनाथ के बराबर नहीं तो उनसे बहुत कम भी नहीं - चाहे व्यापम घोटाला हो या फिर किसानों का उग्र आंदोलन, कोई उनसे मुख्यमंत्री का पद छोड़ने के लिए नहीं कह सकता. जबकि विकास और गवर्नेंस के मामले में वे योगी से काफी आगे दिखते हैं.

कहने वाले तो यह भी कहते हैं कि शिवराज ही हैं जिनकी वजह से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस राज्य की राजनीति में बने हुए हैं. कहा जाता है कि दिल्ली से कुछ कोशिशें इस दिशा में हुई थीं कि इनमें से कुछ लोगों को केंद्र में ले आया जाए. लेकिन शिवराज ऐसे किसी प्रस्ताव का विरोध करते हैं जिससे दूसरे मुख्यमंत्रियों को भी न कहने का आधार मिल जाता है.

हाल ही में जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह मध्य प्रदेश गए तो उन्होंने साफ कर दिया कि अगले साल होने वाला विधानसभा का चुनाव शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा. यह भी पार्टी में उनके प्रभाव को दिखाता है.

शिवराज सिंह चौहान की ताकत अगर बनी हुई है तो इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि अगर कभी ऐसी स्थिति बनती है कि पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को नरेंद्र मोदी का विकल्प तलाशना पड़े तो चौहान भी वह विकल्प हो सकते हैं.

शिवराज सिंह चौहान की सौम्य और आम आदमी के करीब दिखने वाली छवि उन्हें पार्टी के दूसरे मुख्यमंत्रियों के मुकाबले अधिक स्वीकार्य भी बनाती है. कुल मिलाकर सत्याग्रह के छहों पैमानों पर वे 2016 जितने मजबूत नहीं तो बहुत कमजोर भी नहीं दिखाई देते हैं.

महामुख्यमंत्री-2017 : देश के सबसे ताकतवर और प्रभावी 10 मुख्यमंत्री

#1 कई अगर-मगर के बाद भी नीतीश कुमार ही इस बार के भी महामुख्यमंत्री हैं

#2 विकास और गवर्नेंस के पैमाने पर चंद्रबाबू नायडू बाकी मुख्यमंत्रियों से मीलों आगे हैं

#3 ममता बनर्जी मोदी लहर का सफलतापूर्वक मुकाबला करने वाले गिने-चुने लोगों में से हैं

#4 शिवराज सिंह चौहान पिछले साल से बस जरा से ही नीचे खिसके हैं

#5 आज की कांग्रेस में अमरिंदर सिंह से अधिक ताकतवर कोई और मुख्यमंत्री नहीं है

#6-10 इनमें से एक मुख्यमंत्री को शीर्ष तीन में होना चाहिए था और एक पिछली बार शीर्ष दो में था

महामुख्यमंत्री-2016 : देश के सबसे ताकतवर और प्रभावी 10 मुख्यमंत्री