बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) में लड़कियों पर लाठीचार्ज को लेकर प्रशासन के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन तेज होता दिखाई दे रहा है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक प्रशासन ने सोमवार को 1,000 छात्रों के खिलाफ आगजनी का मामला दर्ज कराया है. हालांकि, छात्रों के गुस्से को शांत करने के लिए लंका थाने के प्रभारी राजीव सिंह और बेलापुर के सर्किल ऑफिसर निवेश कटियार को हटा दिया गया है. इसके अलावा तीन अतिरिक्त सिटी मजिस्ट्रेट मनोज कुमार सिंह, सुशील कुमार गोंड और जगदम्बा प्रसाद सिंह को भी हटाया गया है. प्रशासन ने शनिवार रात बीएचयू की छात्राओं पर लाठीचार्ज के लिए इन्हें पहली नजर में जिम्मेदार माना है.

बीएचयू परिसर में अपने साथ आए दिन होने वाली अभद्रता के खिलाफ छात्राएं शुक्रवार से धरने पर बैठीं थीं. छात्राओं की मांग थी कि बीएचयू के वाइस चांसलर मौके पर आकर उनकी समस्यायें सुनें और निस्तारण करें. हालांकि, शनिवार रात स्थानीय पुलिस ने उन्हें हटाने की कोशिश की और जब वे नहीं मानीं तो उन पर लाठीचार्ज कर दिया. इसमें कई छात्राएं घायल हुईं. इसमें लड़कियों के साथ धरने में शामिल छात्र भी घायल हुए थे. इसके बाद वाहनों को आग के हवाले करने की भी घटना सामने आई थी.

इस घटना के लिए उत्तर प्रदेश की आदित्यनाथ सरकार को चौतरफा आलोचना का सामना करना पड़ा है. इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के मंडलायुक्त नितिन गोकर्ण से रिपोर्ट मांगी है. वहीं, मुख्य सचिव राजीव कुमार ने भी नितिन गोकर्ण और वाराणसी जोन के एडीजी विश्वजीत महापात्रा को संयुक्त रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.

इससे पहले, बीएचयू के वाइस चांसलर गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने पुलिस कार्रवाई का बचाव किया था. उनका कहना है कि कुछ ‘बाहरी तत्व’ विश्वविद्यालय परिसर में अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. इस पर आलोचकों का कहना है कि अगर बाहरी तत्व अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं तो विश्वविद्यालय के छात्रों पर एफआईआर क्यों की जा रही है.