बीते साल इन्हीं दिनों अमेरिका और उत्तर कोरिया एक दूसरे को परमाणु हमले की धमकी दे रहे थे. तब कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु युद्ध की आशंका देख जापान के नोबू हानाओका ने न्यूज चैनल अल जज़ीरा के ज़रिए यह वीडियो संदेश दिया था. इस संदेश को अमेरिका या उत्तर कोरिया ही नहीं बल्कि अपनी परमाणु ताकत पर इतराने वाले तमाम देशों की जनता को देखने-समझने की जरूरत है. परमाणु विस्फोट के बाद के प्रभाव को झेल चुके हानाओका यहां बताते हैं कि यह कहना काफ़ी नहीं है कि परमाणु हथियार से मौत होती है. उनके मुताबिक यह बिना किसी भेदभाव के आपको धीरे-धीरे और दर्दनाक मौत देता है.

अमेरिका ने छह अगस्त, 1945 को जापान के हिरोशिमा शहर पर पहला परमाणु बम गिराया था जिसमें एक लाख 40 हज़ार लोग मारे गए थे. इसके तीन दिन बाद नागासाकी शहर पर परमाणु हमला हुआ. इस धमाके में क़रीब 74 हज़ार लोगों की मौत हो गई थी, लेकिन क़िस्मत से हानाओका बच गए. तब उनकी उम्र आठ महीने की थी और वे अपने परिवार के साथ शहर के बाहर थे. वे बताते हैं, ‘हम नागासाकी में नहीं थे, लेकिन यहां फटे बम का रेडिएशन शहर की सीमा से काफ़ी आगे तक पहुंच गया था.’

वे जब छह साल के थे तब परमाणु बम के रेडिएशन के प्रभाव से जूझ रहीं उनकी मां और बहन की मौत हो गई. इसी समय डॉक्टर ने उनके पिता से कहा था कि उनका बेटा अपना दसवां जन्मदिन नहीं देख पाएगा. यह हानाओका की किस्मत ही थी कि डॉक्टर की भविष्यवाणी सही साबित नहीं हुई. उन्होंने डॉक्टर और अपने पिता की बातचीत सुन रखी थी. इस वीडियो में वे कहते हैं, ‘मैं डरता था कि जरा भी ठंड लगने पर मेरी मौत हो जाएगी.’

हानाओका अब 74 साल के हैं. वे बताते हैं कि जब उनको बेटा हुआ तो उन्होंने डॉक्टर से पूछा था कि क्या उसके हाथ में पांचों उंगलियां हैं या नहीं. जब डॉक्टर ने बताया कि उनका बेटा पूरी तरह से स्वस्थ है तो उन्होंने राहत की सांस ली. हानाओका बताते हैं, ‘मुझे डर था कि परमाणु बम के रेडिएशन का असर मेरे बच्चे पर ना पड़ जाए.’

हानाओका आज भी अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहते हैं. वे मानसिक रूप से इस सच्चाई से भी परेशान रहते हैं कि जिस घातक हमले से वे बच गए, उसमें अन्य लोग क्यों नहीं बच पाए. वे पूछते हैं, ‘मैं अभी-भी जिंदा हूं, लेकिन मेरी मां और बहन को क्यों मरना पड़ा? वे बहुत सुंदर और अच्छी थीं.’ हानाओका चाहते हैं कि सभी देश एक साथ आएं और परमाणु हथियारों को ख़त्म करने का रास्ता निकालें.