भारतीय कार बाजार में तेजी से बढ़ रहे कॉम्पैक एसयूवी सेगमेंट में अब देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स भी अपनी बहुप्रतिक्षित कार नेक्सन के साथ मैदान में उतर चुकी है. नेक्सन की पहली झलक 2014-ऑटो एक्सपो में एक कॉन्सेप्ट के तौर पर देखने को मिली थी जिसे लोगों ने जमकर सराहा था. इसके करीब दो साल बाद टाटा मोटर्स ने ऑटो एक्सपो-2016 में नेक्सन का प्रोडक्शन रेडी वर्जन पेश किया. तभी से भारत के कार बाजार में इस गाड़ी इंतजार किया जा रहा था.

एक विकल्प के तौर पर नेक्सन की सार्थकता समझने के लिए सबसे पहले एक नज़र इस गाड़ी की खूबियों पर डालते हैं.

लुक्स

आमधारणा से अलग टाटा मोटर्स ने नेक्सन को लगभग वही लुक दिया है जो इसकी पहली झलक के समय था. रेड और ब्लू जैसे ब्राइट कलर्स और कॉन्ट्रास्ट रूफ़ के साथ नेक्सन काफी आकर्षक दिखती है. एलईडी डे-टाइम रनिंग लैंप (डीआरएल) और प्रोजेक्टर हेडलैंप्स के साथ नेक्सन सामने से लुभाती है. इनके अलावा नेक्सन में फ्रंट और रियर दोनों तरफ फॉगलैंप्स और आउटसाइड रियर व्यू मिरर (ओआरवीएम) के साथ इंडिकेटर दिए गए हैं. डुअल टोन पेंट और स्टाइलिश रूफ रेल्स के साथ पीछे की तरफ लगा डीफॉगर नेक्सन को बढ़िया स्पोर्टी लुक देते हैं.

डायमेंशन्स- ग्राउंड क्लियरेंस ब्रेजा और इकोस्पोर्ट से ज्यादा

नेक्सन के डायमेंशंस की बात की जाए तो टाटा की यह नयी कार 3994 मिमी लंबी, 1811 मिमी चौड़ी और 1607 मिमी ऊंची होगी. नेक्सन काnex ग्राउंड क्लियरेंस 209 मिमी और व्हीलबेस 2498 मिमी रखा गया है. यानी नेक्सन लंबाई में इसी सेगमेंट की मारुति ब्रेजा के लगभग बराबर और चौड़ाई में फोर्ड इकोस्पोर्ट से करीब 45 मिमी चौड़ी है. ऊंचाई के मामले में नेक्सन ब्रेजा और इकोस्पोर्ट दोनों से ही 30 मिमी और 100 मिमी कम रह जाती है. लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं कि ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर इस कार को चलाने में आपको कोई दिक्कत आने वाली है क्योंकि इसका ग्राउंड क्लियरेंस (209 मिमी) ब्रेजा और इकोस्पोर्ट दोनों से ही ज्यादा है.

इंटीरियर्स

नेक्सन के फ्रंट सेंट्रल कंसोल में (आर्मरेस्ट के नीचे) स्लाइड कवर के साथ मोबाइल और वॉलेट जैसे छोटे सामान रखने के लिए बेहतरीन स्पेस दिया गया है. कार में कपहोल्डर्स के साथ रियर आर्मरेस्ट और छतरी (फोल्डिंग) रखने के लिए इसके दरवाजों में अपनी तरह का पहला खास स्टोरेज स्लॉट मिलता है. नेक्सन के ग्लवबॉक्स में लगी ट्रे पर आप अपना टेबलेट और काम की फाइल्स वगैरह आराम से रख सकते हैं. इतना ही नहीं इस ट्रे के रीमूवेबल होने की वजह से यह जगह आपके लिए खाने की छोटी सी टेबल का भी काम कर सकती है.

लेगरूम के लिहाज से भी नेक्सन की फ्रंट और रियर दोनों सीटों पर अच्छा खासा स्पेस है. इस कार के बूट स्पेस की बात की जाए तो यह 350 लीटर का है जिसे पिछली सीटों को मोड़कर 690 लीटर तक बढ़ाया जा सकता है.

फीचर्स

नेक्सन स्टार्ट-स्टॉप बटन, रियर एयर वेंट्स, ऑटोमेटिक क्लाइमेट कंट्रोल, ड्राइवर साइड ऑटोडाउन के साथ चारों पॉवर विंडो, रिवर्स कैमरा, पार्किंग सेंसर जैसी खूबियों से लैस है. एपल कार प्ले के साथ 6.5 इंच का हारमन कनेक्टनैक्स्ट इंफोटेनमेंट सिस्टम, एंड्रॉइड ऑटो और नेविएगेशन जैसी खूबियां भी नेक्सन को खास बनाती हैं. गाड़ी को बनाते समय टाटा ने सुरक्षा का भी खासा ख्याल रखा है. कंपनी ने नेक्सन को एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस) और डुअल फ्रंट एयरबैग्स जैसे स्टैंडर्ड फीचर्स से नवाजा है. इसके अलावा नेक्सन में सेगमेंट का पहला मल्टी ड्राइव सेलेक्टर भी दिया गया है. इसकी मदद से इको, सिटी और स्पोर्ट जैसे तीन ड्राइव मोड चुने जा सकते हैं. हालांकि इन तमाम खूबियों के बावजूद नेक्सन में क्रूज कंट्रोल जैसे अहम फीचर के साथ सनरूफ की कमी भी खूब खलती है.

इंजन और ट्रांसमिशन

टाटा मोटर्स की नेक्सन न सिर्फ न्यू ब्रांड लुक और नए इंटीरियर्स के साथ ही नहीं आई है बल्कि इस कार के साथ आने वाले इंजन भी बिल्कुल नए हैं. कंपनी का कहना है कि नेक्सन पेट्रोल और डीज़ल, दोनों इंजन के साथ बाजार में उपलब्ध करवाई जाएगी. तीन सिलेंडर वाला इसका 1.2 लीटर क्षमता वाला टर्बोचार्ज्ड रेवट्रॉन पेट्रोल इंजन 5000 आरपीएम पर 108 बीएचपी की अधिकतम पॉवर के साथ करीब 170 एनएम का टॉर्क देता है. वहीं 1.5 लीटर क्षमता से लैस चार सिलेंडर वाला इसका रेवटॉर्क डीज़ल इंजन 3750 आरपीएम पर 108 बीएचपी की अधिकतम ताकत के साथ करीब 260 एनएम का टॉर्क पैदा करने में सक्षम है. दोनों ही इंजन फिलहाल 6-स्पीड मैनुअल गियर बॉक्स से जुड़े हैं. बताया जा रहा है कि नेक्सन का ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन वेरिएंट अगले साल तक बाजार में आ सकता है.

कीमत

टाटा मोटर्स ने नेक्सन को एक्सई, एक्सएम, एक्सटी और एक्सजेड प्लस जैसे चार वेरिएंट के साथ बाजार में उतारा है. इनकी कीमत की बात करें तो टाटा नेक्‍सन के पेट्रोल वेरिएंट बेस मॉडल एक्‍सई की कीमत 5.85 लाख रुपए है. वहीं इसके एक्सएम वेरिएंट की कीमत 6.5 लाख, एक्सटी मॉडल की 7.3 लाख और सेकेंड टॉप मॉडल एक्सज़ेड की कीमत 8.45 लाख रुपए तय की गई है. नेक्सन के पेट्रोल टॉप वेरिएंट एक्सज़ेड+ को खरीदने के लिए आपको 8.6 लाख रुपए चुकाने होंगे.

अब बात करते हैं नेक्‍सन के डीज़ल वेरिएंट की तो इसका बेस वेरिएंट एक्सई 6.85 लाख रुपए में मिलेगा. वहीं इसके एक्सएम वेरिएंट की कीमत 7.4 लाख रुपए तय की गई है. नेक्सन डीज़ल के एक्सटी वेरिएंट की कीमत 8.15 लाख, एक्सज़ेड की कीमत 9.3 लाख और एक्सज़ेड+ वेरिएंट की कीमत 9.45 लाख रुपए रखी गई है.

क्या इस बार भी टाटा की छोटी-छोटी गलतियां नेक्सन की खूबियों पर भारी पड़ सकती हैं?

वैसे तो नेक्सन को बनाने में टाटा मोटर्स ने काफी मेहनत की है लेकिन इस कवायद में कंपनी बाजार में मौजूद अपने प्रतिद्वंदियों से बहुत पिछड़ भी गई है. एक ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ के शब्दों में, ‘गाड़ियों से ज्यादा सेगमेंट लॉन्च करने के लिए पहचाने जाने वाली टाटा मोटर्स सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ रहे सेगमेंट (कॉम्पैक एसयूवी) में दूसरों से बहुत पीछे रह गयी.’ वे कहते हैं, ‘आज की तारीख में लगभग हर प्रमुख कंपनी इस सेगमेंट में अपने बेहतरीन प्रोडक्ट के साथ मौजूद है. ऐसे में टाटा जैसी (छोटी गाड़ियों के मामले में) कमजोर छवि वाली कंपनी के लिए किसी भी सेगमेंट में देर से एंट्री करने का खामियाज़ा भुगतना तय माना जाता है.’

दरअसल कॉम्पैक एसयूवी सेगमेंट में मारुति-सुज़ुकी की ब्रेज़ा प्रति-महीने तकरीबन 10 हजार यूनिट की रिकॉर्ड बिक्री के साथ हर रोज सफलता के नए आयाम गढ़ रही है और बाज़ार के शीर्ष पर काबिज़ है. ब्रेज़ा के बाद बाजार के एक बड़े हिस्से पर देश में सेगमेंट की शुरुआत करने वाली फोर्ड की इकोस्पोर्ट और रेनो की डस्टर ने कब्ज़ा जमा रखा है. इन गाड़ियों के अलावा ग्राहकों का एक बड़ा वर्ग महिंद्रा की टीयूवी 300 और केयूवी 100 जैसी गाड़ियों का रुख़ करता है. इनमें से डस्टर और टीयूवी-300 के अपडेटेड वर्जन हाल ही में लॉन्च हुए हैं और खबरों की मानें तो इकोस्पोर्ट बिल्कुल नए अंदाज में बाजार में दस्तक देने को तैयार है.

ऐसे में जानकारों का कहना है यदि बाजार में जांची-परखी गाड़ियां नए फीचर्स और लुक्स के साथ उपलब्ध होती हैं तो अधिकतर ग्राहक किसी नई गाड़ी के साथ जाने से बचते हैं. एक ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ के मुताबिक यदि कोई खरीददार इस सेगमेंट में किसी नई कार को चुनना चाहता है तो फीचर्स और परफॉर्मेंस के लिहाज़ से बेहतरीन विकल्प होने के बावजूद टाटा की कमजोर छवि नेक्सन पर भारी पड़ सकती है और ग्राहक इसकी बजाय होंडा डब्ल्यूआर-वी जैसी कारों के साथ जाना ज्यादा पसंद करेंगे.

जानकार ये भी कहते हैं कि सेगमेंट के लिहाज़ से नेक्सन की कीमतें संतोषजनक हैं लेकिन फीचर्स और अन्य मामलों में टाटा मोटर्स को और ज्यादा सज़ग रहने की जरूरत थी ताकि गाड़ी में किसी भी स्तर पर कोई कसर न रहने पाए. उनके मुताबिक नेक्सन को बनाते समय टाटा मोटर्स ने बाजार में पहले से मौजूद ऐसे कई फीचर्स को शामिल नहीं किया जो नयी पीढ़ी को लुभाने में काफी अहम किरदार निभाते हैं. क्रूज़ कंट्रोल और सनरूफ ऐसी ही कुछ खूबियां हैं. घरेलू कार बाजार पर नज़र रखने वालों के अनुसार भारतीय ग्राहक अक्सर किसी कंपनी को दूसरा मौका नहीं देते, ऐसे में टाटा को चाहिए था कि वह नेक्सन का ऑटोमैटिक वर्जन अगले साल की बजाय मैनुअल ऑप्शन के साथ ही बाजार में उपलब्ध करवाती.

इनके अलावा नेक्सन के व्हील्स की साइज़ और फिनिशिंग थोड़ी और बढ़ाई जा सकती थी जिससे यह कार ज्यादा हैवी दिखने के साथ और ज्यादा प्रीमियम लुक देती. इंटीरियर्स की फिनिशिंग और इंजन की रिफाइनिंग के लिहाज से भी नेक्सन में सुधार की गुंजाइश लगती है. जानकार कहते हैं कि यदि टाटा मोटर्स कार बाजार में एक बार फिर से उसी स्तर पर स्थापित होना चाहती है जहां वह कभी पहले हुआ करती थी तो उसे समान कीमत में अपने ग्राहकों को मौजूदा विकल्पों से कुछ ज्यादा ही उपलब्ध करवाना होगा, बजाय छोटी-छोटी कमियां छोड़ने के. उनका मानना है कि आगे चलकर ये कुछ मामूली भूलें ही कंपनी के बड़े अरमानों पर पानी फेरने का काम करती हैं.