अभिव्यक्ति की आजादी का लुत्फ़ उठाने के लिए अगर 140 अक्षर (करैक्टर्स) ही दिए जाएं, तो बहुतों को यह आजादी भी बंधन ही लग सकती है. शायद यही सोचकर सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर ट्वीट की लंबाई बढ़ाने पर विचार कर रही है. कंपनी ने एक छोटे से समूह के बीच ट्वीट के लिए तय अक्षरों की सीमा को बढाकर 280 कर दिया है. अगर उसका यह परीक्षण सफल रहा तो साल के अंत तक ट्विटर इस नए फीचर को अपने बाकी यूजर्स के लिए भी लांच कर देगा.

इसकी जानकारी ट्विटर ने खुद एक ब्लॉग के जरिए दी है. उसने लिखा है, ‘करैक्टर्स की संख्या लिमिटेड (140) होने की वजह से कई बार यूजर्स को कुछ खास शब्द हटाने पड़ते थे. कई बार तो इस वजह से लोग ट्वीट ही नहीं करते थे... हालांकि हम अपने डाटा और इस बदलाव के सकारात्मक प्रभाव को लेकर आश्वस्त हैं लेकिन फिर भी किसी अंतिम फैसले पर पहुंचने से पहले हम इसे कुछ सीमित लोगों के बीच आजमाना चाहते हैं.’

इससे पहले जनवरी 2016 में भी खबर आई थी कि ट्विट्टर 140 अक्षर की सीमा को बढ़ाकर दस हजार करने जा रहा है. उस समय कहा गया था कि टाइमलाइन पर यूज़र को 140 अक्षर ही दिखेंगे और संदेश का बाकी हिस्सा ट्वीट पर क्लिक करने के बाद पढ़ा जा सकेगा. यह भी कहा गया था कि यह फैसला 2016 के शुरूआती तीन महीनों में लागू कर दिया जाएगा. लेकिन, ऐसा किया नहीं गया.

2016 में ट्वीट के अक्षर बढ़ाने का फैसला टालने की वजह

पिछले साल ट्विटर के अक्षरों की संख्या बढ़ाने का फैसला टालने के पीछे दो मुख्य वजहें थीं. जैसे ही यह खबर मीडिया में आई कंपनी के शेयरों में तीन प्रतिशत की गिरावट आ गई. अधिकांश लोगों और शेयर धारकों का मानना था कि 140 अक्षरों की सीमा कोई बंधन नहीं है, बल्कि ट्विटर का मुख्य आकर्षण है, जो इसे फेसबुक और ब्लॉगों से अलग करता है. कुछ लोगों का यह भी मानना था कि आज किसी के पास भी ज्यादा लंबे-लंबे ट्वीट पढने का वक्त नहीं है, और 140 अक्षरों की सीमा यूज़र्स को ‘टू द प्वाइंट’ लिखने को भी मजबूर करती है.

दूसरी वजह ट्विटर से जुड़े एक आंकड़े को माना जाता है. पिछले साल जनवरी में ट्विटर के कुल यूजर्स की संख्या 64.5 करोड़ थी. इनमें से 28.9 करोड़ एक्टिव यूज़र थे. इनमें करीब 75 प्रतिशत लोग ऐसे थे जिन्होंने 10 से कम ट्वीट ही किये थे इनमें से भी 40 प्रतिशत ऐसे थे जिन्होंने कभी कोई ट्वीट किया ही नहीं था. लेकिन ये नियमित रूप से अन्य लोगों के ट्वीट पढ़ते थे. इन लोगों के द्वारा केवल दूसरों के ट्वीट पढने का मुख्य कारण उनका छोटा होना ही माना जाता है. अब ट्विटर के निर्माताओं के सामने यह खतरा था कि ट्वीट की लंबाई बढ़ाने के चलते कहीं ये लोग ट्विटर से दूर नहीं चले जाए.

माना जाता है कि इस आंकड़े और शेयर होल्डर्स के रुख की वजह से ट्विटर ने इस फैसले को ठंडे बस्ते में डालना ही सही समझा. अब कंपनी अक्षरों की सीमा 280 किए जाने की संभावना से साफ़ है कि ट्विटर ने दस हजार अक्षरों के ट्वीट का अपना फैसला रद्द कर दिया है.

140 अक्षर इस्तेमाल करने की सीमा के पीछे की वजह क्या है?

ट्विटर पर 140 अक्षर इस्तेमाल करने की सीमा के पीछे की वजह कभी इसका मोबाइल शॉर्ट मेसेज सर्विस (एसएमएस) पर निर्भर होना था. ट्विटर की शुरुआत उस समय हुई थी जब स्मार्टफोन आम नहीं था. तब ट्वीट करने के लिए मोबाइल की मैसेजिंग सर्विस का उपयोग किया जाता था. चूंकि, मोबाइल में मैसेज लिखने के लिए 160 अक्षरों की सीमा निर्धारित है. इसलिए ट्वीट लिखने के लिए भी 160 अक्षर तय किये गए थे. इनमें से 140 अक्षरों का इस्तेमाल ट्वीट लिखने के लिए और 20 अक्षरों का बाकी जानकारी के लिए किया जाता था.

मोबाइल में एसएमएस के लिए 160 अक्षरों की सीमा का निर्धारण एक जर्मन इंजीनयर फ्रीदेल्हम हिलेब्रैंद ने 1985 में किया था. उस समय वे एक ऐसा सिस्टम बनाने की कोशिश कर रहे थे, जिससे मोबाइल के जरिये एक छोटा सा मैसेज भेजा जा सके. हिलेब्रैंद ने कई बार प्रयोग करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि छोटे मैसेज के लिए 160 अक्षर पर्याप्त हैं . इसके बाद मोबाइल मैसेज सर्विस 160 अक्षरों तक सीमित कर दी गयी.