2019 के लोकसभा चुनावों में अभी तकरीबन डेढ़ साल का वक्त है. चुनाव 2019 में अप्रैल-मई महीने में प्रस्तावित हैं. लेकिन ऐसा लग रहा है कि केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी अभी से ही उन चुनावों की तैयारियों में जुट गई है. बीते सोमवार को दिल्ली में पार्टी ने जो कार्यकारिणी आयोजित की, उसमें जिन लोगों को बुलाया गया और जिस तरह की बातें की गईं, उससे तो इसका स्पष्ट संकेत मिलता है.

आम तौर पर पार्टी कार्यकारिणी में पार्टी अध्यक्ष द्वारा चुने गए तकरीबन 150 नेता होते हैं. इसके अलावा केंद्रीय मंत्री और पार्टी के पदाधिकारी अपने पद पर होने के नाते कार्यकारिणी के सदस्य होते हैं. पार्टी मुख्यमंत्रियों को विशेष आमंत्रित सदस्य के नाते कार्यकारिणी में बुलाया जाता है. लेकिन राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित पार्टी की इस बार की कार्यकारिणी काफी अलग थी. क्योंकि इसमें सिर्फ वही लोग नहीं थे जो पारंपरिक तौर पर कार्यकारिणी के सदस्य हैं बल्कि बड़ी संख्या में पार्टी के वैसे नेताओं को भी बुलाया गया था जो कार्यकारिणी का हिस्सा नहीं हैं.

राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पार्टी के लोकसभा और राज्यसभा के सभी 334 सांसदों को बुलाया गया. यही नहीं, इनमें ऐसे 232 लोगों को भी बुलाया गया जो अलग-अलग राज्यों में पार्टी की सरकारों में मंत्री हैं. देश के अलग-अलग राज्यों में पार्टी के तकरीबन 1500 विधायक हैं. इन सभी को पार्टी ने इस बार की कार्यकारिणी में बुलाया था. इनके अलावा पार्टी के जिला स्तर के पदाधिकारी तो इसमें थे ही.

इसका मतलब बिल्कुल साफ है. कार्यकारिणी में आए नेताओं की संख्या न सिर्फ बड़ी थी बल्कि इनका दायरा भी व्यापक था. इसका सीधा सा मतलब यह हुआ कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व संगठन के हर उस व्यक्ति को संदेश देना चाहता था जो किसी न किसी अहम भूमिका में है. यह संदेश क्या था, इस बारे में स्थिति तब साफ होगी जब यह समझा जाए कि कार्यकारिणी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की ओर से क्या बातें कही गईं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार और इसके खिलाफ उनकी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की चर्चा की. उन्होंने इस परिप्रेक्ष्य में नोटबंदी के फैसले का सही ठहराया और कहा कि इससे काले धन की समस्या से लड़ने में मदद मिलेगी. उन्होंने नोटबंदी के और भी कई फायदे गिनाए. इसके अलावा बेनामी संपत्ति के खिलाफ बनाए गए कानून का जिक्र भी उन्होंने किया. साथ ही वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के फायदे भी गिनाए.

प्रधानमंत्री की ये बातें नई नहीं हैं. वे हर मंच पर ये बातें कहते हैं. लेकिन 2019 के चुनावों की तैयारियों का संकेत अमित शाह ने दिया. उन्होंने कहा कि सरकार ने अब तक के अपने कार्यकाल में कई बड़े काम किए हैं और इसका फायदा भी लोगों को मिल रहा है. उन्होंने कार्यकारिणी में आए नेताओं से कहा कि हम सभी को मिलकर पूरी जिम्मेदारी के साथ सरकार के कामकाज और इसके फायदों को लोगों को बीच लेकर जाना चाहिए.

अमित शाह की इन बातों से स्पष्ट हो जाता है कि बड़ी संख्या में पार्टी नेताओं को कार्यकारिणी में क्यों बुलाया गया था. सरकार की जिन योजनाओं का बखान प्रधानमंत्री ने किया, वित्त मंत्री अरुण जेटली, दूसरे मंत्रियों और बड़े नेताओं ने जो बातें कहीं, अब उन्हें जन-जन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी कार्यकारिणी में बुलाए गए नेताओं की है. एक तरह से कहा जाए तो अमित शाह ने लोकसभा चुनावों के तकरीबन डेढ़ साल पहले उन्हें होमवर्क दे दिया है.

इस कार्यकारिणी से एक और बात स्पष्ट हो गई है कि विपक्ष की खस्ता हालत देखते हुए भी भाजपा या यों कहें कि मोदी और शाह की जोड़ी अगले चुनावों को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती. इसलिए डेढ़ साल पहले ही पार्टी के निचले स्तर तक के नेताओं को पार्टी शीर्ष नेतृत्व ने चौकस करने का काम शुरू कर दिया है.

कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि नोटबंदी और जीएसटी जैसे सरकार के निर्णयों से काफी लोगों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा है. इस वजह से सरकार और पार्टी में लोगों को लगता है कि कोई भी जोखिम लेना ठीक नहीं है और अपनी तैयारी पूरी ताकत के साथ करनी होगी. इस कार्यकारिणी की रूपरेखा इसी पृष्ठभूमि में तैयार की गई लगती है.

अब ऐसे में विपक्ष कहां है, इसे भी संक्षेप में समझना प्रासंगिक है. कहां तो भाजपा अभी से ही चुनावी तैयारियों में लग गई है और कहां विपक्ष अभी एक मंच पर आने तक की स्थिति में नहीं है. कांग्रेस के कर्ताधर्ता कहे जा रहे पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी अब भी यह निर्णय नहीं ले पा रहे हैं कि उन्हें पार्टी अध्यक्ष बनना है या नहीं. अगर नहीं तो फिर पार्टी की अगुवाई 2019 में कौन करेगा? गैर कांग्रेसी नेताओं में कौन-कौन कांग्रेस के साथ रहेंगे? अगले लोकसभा चुनावों में विपक्ष का एजेंडा क्या होगा? ये सारे ऐसे सवाल हैं जिन्हें लेकर विपक्ष में एक चुप्पी दिख रही है. जाहिर है कि जब तक इन सवालों पर एक स्पष्ट राय नहीं बना ली जाती तब तक उसका चुनावी तैयारियों की दिशा में पहल करना मुश्किल होगा.