बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की तरह जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई) भी अब छात्राओं के मामले में विवादित स्थिति में उलझ सकता है. डीएनए अख़बार की ख़बर के मुताबिक बीएचयू विवाद के बाद जेएमआई प्रशासन ने विश्वविद्यालय छात्रावास में रहने वाली छात्राओं पर जो पाबंदियां लगाई हैं उससे यह संकेत मिलता है.

अख़बार के मुताबिक जेएमआई प्रशासन ने तय किया है कि अगर कोई छात्रा रातभर छात्रावास से बाहर रहना चाहती है तो इसकी सूचना पहले वह अपने माता-पिता को देगी. इसके बाद माता-पिता (ख़ास तौर पर पिता) की ओर से हॉस्टल वॉर्डन के मोबाइल पर यह सूचना भेजी जाएगी. वॉर्डन को भेजे इस संदेश में उन्हें अपनी बेटी के नाम के साथ यह भी बताना होगा कि वह किस कमरे में रहती है. साथ में यह कि वह किस तारीख़ की रात को हॉस्टल से बाहर रहेगी.

ख़बर के अनुसार यह आदेश हॉस्टल में रहने वाली सभी छात्राओं पर लागू होगा. हालांकि इस आदेश के बाद छात्राओं में असंतोष है. क्योंकि अव्वल तो इस तरह के आदेश को सिर्फ मौख़िक रूप से ही लागू कराया जा रहा है. और दूसरी बात- लड़कों के छात्रावास के लिए इस तरह का कोई नियम नहीं बनाया गया है. स्नातक तृतीय वर्ष की एक छात्रा ने अख़बार को बताया, ‘नए नियम के बारे में हमें मौखिक रूप से ही बताया गया है. कोई लिखित आदेश नहीं है.’

एक अन्य छात्रा ने बताया, ‘हमसे कहा गया है कि हम अगर बाहर जाना चाहते हैं तो पिताजी के ज़रिए वॉर्डन के मोबाइल पर संदेश पहुंचना चाहिए. क्योंकि उन्हें (विश्वविद्यालय प्रशासन) लगता है कि मां को आसानी से मनाया जा सकता है.’ बताया जाता है कि इस ‘सख़्ती से नाराज़’ हॉल ऑफ गर्ल्स रेज़ीडेंस (पुराना छात्रावास) की छात्राओं ने वॉर्डन अज़रा खुर्शीद के सामने विरोध दर्ज़ कराया है क्योंकि उन्हें इस नियम के लागू होने की पूर्व सूचना भी नहीं दी गई.

हालांकि अज़रा इस नियम का बचाव करती हैं. उनके मुताबिक, ‘यह भेदभाव नहीं बल्कि अनुशासन से जुड़ा मामला है. हमें ऐसी जानकारियां लगातार मिल रही हैं कि लड़कियां हॉस्टल से यह कहकर निकलती हैं कि वे अपने लोकल गार्जियन के पास जा रही हैं. लेकिन असल में जाती कहीं और हैं. इसीलिए यह नियम लागू किया गया है. लड़कियों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है. जहां तक लड़कों का ताल्लुक है तो वे बहुत से हालात से ख़ुद ही निपट लेते हैं.’