जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने एक बीएसएफ़ जवान की हत्या कर दी. इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़ 33 साल के बीएसएफ़ कॉन्स्टेबल रमीज़ पर्राय छुट्टियों में बांदीपोर ज़िले स्थित अपने घर आए हुए थे. बुधवार को आतंकियों ने उन्हें घर से घसीटकर निकाला और गोली मार दी. पुलिस ने बताया कि रमीज़ के परिवार के तीन सदस्य भी इस हमले में घायल हुए हैं.

इस घटना के बारे में बताते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एसपी वैद ने कहा, ‘तीन से चार आतंकी बीएसएफ़ कॉन्स्टेबल (रमीज़) के घर आए और गोलियां चलानी शुरू कर दीं. उन्हें घर से बाहर घसीट कर लाया गया और गोली मार दी गई.’ रमीज़ की मौत मौक़े पर ही हो गई. रमीज़ की हत्या पर बीएसएफ़ ने भी बयान जारी कर इस हमले को कायरना हरकत बताया. उसने बताया कि रमीज़ 73 बटालियन में अपनी सेवा दे रहे थे.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक यह साफ़ नहीं है कि उनकी हत्या में किस संगठन का हाथ है. हालांकि हाजिन इलाक़े में लश्कर-ए-तैयबा का काफ़ी प्रभाव है. वहीं, घटना के बाद परिवार के घायल सदस्यों को श्रीनगर अस्पताल ले जाया गया. एनडीटीवी की ख़बर के मुताबिक़ परिवार के चार लोग घायल हुए हैं. इनमें रमीज़ के पिता, दो बेटे और चाची शामिल हैं. चाची की हालत गंभीर बताई गई है.

बड़ी संख्या में कश्मीरी युवक सेना और पैरामिलिट्री बलों का हिस्सा हैं. घाटी में मौजूद आतंकी लंबे समय से उन पर हमला नहीं करते थे. लेकिन अब लगता है हालात बदल गए हैं. इसी साल मई में आतंकियों ने लेफ़्टिनेंट उमर फ़याज़ की हत्या कर दी थी. उमर भी रमीज़ की तरह छुट्टी पर थे और एक शादी में शामिल होने के लिए शोपियां आए हुए थे. आतंकियों ने उन्हें अगवा कर लिया था. अगले दिन गोलियों से उनका छलनी शव मिला था. जून में श्रीनगर की जामा मस्जिद के परिसर में भीड़ ने डीएसपी मोहम्मद अयूब पंडित की भीड़ ने हत्या कर दी थी. पंडित उस समय ड्यूटी पर थे. वे मस्जिद के प्रवेश द्वार पर खड़े थे. उन्होंने वर्दी नहीं पहनी थी, लेकिन उन्हें पहचान लिया गया और फिर पीट-पीटकर मार दिया गया.