हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्‌टर की कुर्सी को फिलहाल कोई ख़तरा हो या न हो लेकिन उनके सामने चुनौतियां भररपूर हैं. मसलन- अभी हाल में हुए गुड़गांव नगर निगम के चुनाव. इनमें पहले तो भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला और जब इसका बंदोबस्त हुआ तो राव इंद्रजीत सिंह के ज़रिए जो खट्‌टर के प्रतिद्वंद्वी समझे जाते हैं.

द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक गुड़गांव के सांसद और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में राज्य मंत्री राव इंद्रजीत ने नगर निगम चुनाव में जीते छह निर्दलीय पार्षदों को भाजपा में शामिल कराया है. इसके बाद निगम में पार्टी को पूर्ण बहुमत हासिल हो गया है. इन छह निर्दलीयों में दो तो वे पार्षद भी हैं जिन्होंने पार्टी की इच्छा के ख़िलाफ जाकर चुनाव लड़ा था. इसके बाद पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था. हालांकि चुनाव जीतने के बाद अब वे फिर पार्टी में आ गए हैं.

इन पार्षदों के भाजपा के साथ जुड़ने के बाद अब निगम में पार्टी की सदस्य संख्या 20 हो चुकी है जो कि बहुमत के लिए ज़रूरी 18 सीटों से दो ज़्यादा है. बताते चलें कि भाजपा ने गुड़गांव नगर निगम की सभी 35 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. लेकिन उसके प्रत्याशी जीते सिर्फ 14 पर. इसके उलट निर्दलीय प्रत्याशियों ने 20 सीटें जीत लीं. इनमें कई भाजपा से अलग होकर चुनाव लड़े थे. इनके अलावा भारतीय राष्ट्रीय लोकदल (आईएनएलडी) का एक प्रत्याशी जीता है.

इन नतीजों के बाद मंगलवार को मुख्यमंत्री खट्‌टर गुड़गांव आए. उन्होंने पार्टी के प्रदर्शन को ‘अच्छा’ बताया लेकिन उनकी मौज़ूदगी निगम में बहुमत का इंतज़ाम नहीं करा सकी. जबकि इसके उलट राव इंद्रजीत ने एक दिन बाद बुधवार को ही यह बंदोबस्त कर दिया. साथ ही इशारों में निशाना भी साध गए. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘लोगों की उम्मीदें ज़्यादा थीं. मैं टिकट वितरण प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था. लेकिन मुझे लगता है कि थोड़ा सोच-समझकर बेहतर तरीके से टिकट बांटे जा सकते थे.’ सो, इसके बाद अब राव के इशारे का मंतव्य समझने की कोशिशें शुरू हो गई हैं.