मशहूर अंतरराष्ट्रीय अडल्ट मैगज़ीन ‘प्लेबॉय’ के संस्थापक ह्यू हेफ़नर का गुरुवार को उनके घर में निधन हो गया. वे 91 साल के थे. बीबीसी के मुताबिक़ उनकी मौत को सामान्य बताया गया है. हेफ़नर के बेटे कूपर हेफ़नर ने कहा कि कई लोग उनके पिता को याद करेंगे. उन्होंने अपने पिता को ‘मीडिया और सांस्कृतिक मार्गदर्शक’ बताते हुए उनके ‘असाधारण और प्रभावशाली’ जीवन को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने ह्यू हेफ़नर को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, नागरिक अधिकार और यौन स्वतंत्रता की वकालत करने वाला व्यक्ति बताया.

ह्यू हेफ़नर का जन्म शिकागो में हुआ था. 1953 में मशहूर अमेरिकन अभिनेत्री और मॉडल मर्लिन मुनरो की तस्वीर के साथ उन्होंने पहली प्लेबॉय पत्रिका प्रकाशित की जो तुरंत हिट हो गई. आगे चलकर यह दुनिया की सबसे ज़्यादा बिकने वाली पुरुष पत्रिका बनी. हेफ़नर की सफलता का आलम यह रहा कि एक समय प्लेबॉय की 70 लाख कॉपियां एक महीने में बिक जाया करती थीं. हालांकि हेफ़नर के आलोचकों ने उनकी पत्रिका को भद्देपन का पर्याय बताया. 1963 में उन पर प्लेबॉय के ज़रिए अश्लीलता फैलाने के आरोप लगे, लेकिन उन्हें बरी कर दिया गया.

प्लेबॉय के लिए माना जाता है कि इसने नग्नता को स्वीकार्य ही नहीं सम्माननीय बनाने में भी अहम भूमिका अदा की. इसने हेफ़नर को अरबपति बनाया. इस सफलता को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कसीनो और नाइटक्लब भी शुरू किए. रेशमी पाजामा पहनना और प्लेबॉय मॉडल्स को डेट करना उनकी पहचान बन गए. हेफ़नर का दावा था कि वे एक हज़ार से भी ज़्यादा महिलाओं के साथ सो चुके हैं. 2012 में उन्होंने 86 साल की उम्र में क्रिस्टल हैरिस से शादी की जो उनसे 60 साल छोटी थीं. यह हेफनर की तीसरी शादी थी.

प्लेबॉय में जिन बड़ी हस्तियों के इंटरव्यू प्रकाशित हुए उनमें मार्टिन लूथर किंग जूनियर, बीटल जॉनसन लेनन और फ़िदेल कास्त्रो जैसी बड़ी हस्तियां शामिल रहीं. 2002 में सीएनएन को दिए इंटरव्यू में हेफ़नर ने कहा था, ‘मैंने प्लेबॉय को सेक्स मैगज़ीन बनाने की कभी नहीं सोची था.’ उन्होंने कहा, ‘मैंने हमेशा यही सोचा कि मैं इसे लाइफ़स्टाइल मैगज़ीन बनाऊंगा जिसमें सेक्स एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा.’ हेफ़नर ने अपनी ज़िंदगी को भी ‘प्लेबॉय’ के अंदाज़ में जिया. नारीवादियों ने उनकी कड़ी आलोचना की, लेकिन वे ख़ुद को यौन क्रांति का ‘धर्मपिता’ कहते रहे. उनकी ‘प्लेबॉय’ की तर्ज पर भारत में भी कई मैगजीन शुरू हुईं. इनमें डेबोनेयर जैसे नाम भी शामिल हैं जिसके संपादक एक समय चर्चित पत्रकार विनोद मेहता हुआ करते थे.