रेल मंत्रालय का एक कदम केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान पर सवालिया निशान लगाता दिख रहा है. द फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक रेल मंत्रालय पहली बार रेल पटरियों की ख़रीद के लिए वैश्विक निविदा ज़ारी करने वाला है. इसकी वज़ह ये बताई जा रही है कि रेल पटरियों की मांग तेजी से बढ़ रही है और भारत इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) बढ़ी हुई मांग के हिसाब से इनकी आपूर्ति नहीं कर पा रहा है.

ख़बर के मुताबिक राज्य सभा में संसद के मानसून सत्र के दौरान रेल रज्य मंत्री राजेन गोहेन ने बताया था, ‘सेल की ओर रेल पटरियों की पर्याप्त आपूर्ति न हो पाने की वज़ह से दूसरे स्रोतों से इनकी ख़रीद पर विचार किया जा रहा है. सेल ने 2017-18 में 11.45 लाख टन रेल पटरियों की आपूर्ति का वादा किया है. जबकि ज़रूरत इससे 3.14 लाख टन ज्यादा रेल पटरियों की है. इसलिए इस अतिरिक्त मांग को अन्य स्रोतों से पूरा करने की योजना है.’

सूत्र बताते हैं कि सरकार अब इसी दिशा में आगे बढ़ रही है. वैसे भी नए रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्रेनों के बेपटरी होने की घटनाएं रोकने के लिए रेल ट्रैक के नवीनीकरण को अपने शुरुआती लक्ष्यों में शुमार किया हुआ है. एक सूत्र के मुताबिक, ‘उन्हाेंने (गोयल ने) साफ निर्देश दिए हैं कि रेल पटरियों के रखरखाव, नवीनीकरण और नई परियोजनाओं, सभी के लिए रेल पटरियां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होनी ही चाहिए. ऐसे में अब हमारी मांग और बढ़ गई है.’

ग़ौरतलब है कि पिछले कुछ साल तक सेल की ओर से 6-7 लाख टन रेल पटरियों की आपूर्ति की जाती थी. तब तक इतने में रेलवे की मांग भी पूरी हो रही थी. लेकिन बीते दो-तीन साल से रेलवे की मांग में इज़ाफा हुआ है. एक अधिकारी के मुताबिक अभी नए ट्रैक बिछाने के लिए ही 200 किलोमीटर रेल पटरियों की कमी चल रही है. इससे रेल पटरियों के नवीनीकरण के लिए कितनी कमी होगी इसका सहज अंदाज़ा लगाया जा सकता है.