बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने वरिष्ठ अधिवक्ता और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष दुष्यंत दवे को कारण बताओ नोटिस भेजा है. बार एंड बेंच के अनुसार बीसीआई ने जस्टिस जयंत पटेल के तबादले के मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और कॉलेजियम व्यवस्था के खिलाफ टिप्पणी के लिए अधिवक्ता दुष्यंत दवे से चार हफ्ते में जवाब मांगा है.

बुधवार को एनडीटीवी पर चर्चा के दौरान दुष्यंत दवे ने कॉलेजियम को नाम मात्र का आजाद बताया था. कॉलेजियम, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति और तबादले के लिए जिम्मेदार होती है. इस न्यूज चैनल पर दुष्यंत दवे ने कहा था, ‘कॉलेजियम ने न्यायपालिका को राजनीतिक दखल से मुक्त कराने के नाम पर न्यायिक नियुक्ति का अधिकार सरकार से ले लिया, लेकिन आज वास्तव में हो क्या रहा है? सत्ता के करीबी माने जाने वाले या अमित शाह की मदद करने वाले जस्टिस सदाशिवम और जस्टिस चौहान जैसे जजों को पुरस्कृत किया गया है.’ चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की निष्ठा पर सवाल उठाते हुए दवे का कहना था कि उनका नाम कलिखो पुल के सुसाइड नोट में होने के अलावा उनके खिलाफ सीबीआई जांच भी लंबित है.

बीसीआई ने अधिवक्ता दुष्यंत दवे के बयान को आधारहीन बताया है. अपने बयान में बीसीआई ने कहा, ‘दुष्यंत दवे की कल की आधारहीन टिप्पणियां न्यायपालिका और संस्था की छवि छूमिल करने की कोशिश है. भारत के चीफ जस्टिस पर निजी हमला निजी दुश्मनी से प्रेरित लगता है जो गंभीर कदाचार है.’ हालांकि, बीसीआई ने जस्टिस जयंत पटेल के तबादले के कॉलेजियम के फैसले से खुद को असहमत बताया है. इसके अलावा इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के गुजरात बार एसोसिएशन के फैसले का समर्थन करने का भी संकेत दिया है.

इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर मामले में अहम भूमिका निभाने वाले कर्नाटक हाई कोर्ट के जस्टिस जयंत पटेल को सभी योग्यताएं पूरी करने के बावजूद हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नहीं बनाया गया था. वहीं दूसरी तरफ उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया था और इससे नाराज होकर मंगलवार को उन्होंने इस्तीफा दे दिया था.