तहलका पत्रिका के संस्थापक और पूर्व प्रमुख संपादक तरुण तेजपाल पर उत्तरी गोवा की जिला और सत्र अदालत ने कथित बलात्कार और यौन उत्पीड़न के मामले में गुरुवार को आरोप तय कर दिए. इससे पहले बंबई हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने उनके खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने से मना कर दिया था. वे इसी महीने जिला अदालत के फैसले के बाद हाईकोर्ट गए थे. उनके वकील ने आज भी जिला अदालत से इस प्रक्रिया को रोकने की मांग की, लेकिन अदालत ने एक बार फिर उनकी दलील स्वीकार नहीं की. अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 नवंबर को होगी.

गोवा सरकार के वकील ने बाद में पत्रकारों को बताया कि आज अदालत ने आरोप तय करने की प्रक्रिया के तहत आरोपित को उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों को समझाया. कानूनी प्रक्रिया के अनुसार किसी केस में जांच के बाद आरोप तय करना मुकदमे की वास्तविक शुरुआत मानी जाती है. हालांकि तरुण तेजपाल में आज भी अदालत के सामने दोहराया कि वे दोषी नहीं हैं.

इससे पहले बंबई हाईकोर्ट में दी गई अर्जी में तरुण तेजपाल ने कहा था कि उनके खिलाफ सबूतों की कमी है, लिहाजा उनके खिलाफ आरोप तय नहीं होने चाहिए. लेकिन अदालत ने ऐसा करने से मना कर दिया था. उसने इस बारे में गोवा सरकार से भी जवाब मांगा था. हाईकोर्ट ने हालांकि जिला अदालत से यह जरूर कहा कि यदि तरुण तेजपाल पर आरोप तय होते हैं तो उसके फैसले के पहले गवाही की प्रक्रिया शुरू न की जाए.

तरुण तेजपाल पर उनकी एक महिला सहकर्मी ने नवंबर 2013 में गोवा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बलात्कार और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. उनके खिलाफ आईपीसी की 376(2) (बलात्कार) और 354ए (यौन उत्पीड़न) सहित कुल पांच धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ था.