म्यांमार में हिंसा के चलते बांग्लादेश में शरण लेने वाले रोहिंग्या मुसलमानों की वापसी की उम्मीद जगने लगी है. समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार बांग्लादेश के विदेश मंत्री एएच मोहम्मद अली ने सोमवार को ढाका में म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की के प्रतिनिधि क्याव टिंट स्वे के साथ बैठक की. इस बैठक के बाद उन्होंने बताया कि म्यांमार ने रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस लेने का प्रस्ताव रखा है. एएच मोहम्मद अली ने आगे बताया कि दोनों पक्षों ने रोहिंग्या शरणार्थियों की वापसी के दौरान तालमेल बनाने के लिए संयुक्त कार्यकारी समूह बनाने पर भी सहमति जताई है.

इस बीच सोमवार को म्यांमार प्रशासन ने विदेशी राजनयिकों और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों के दल को हिंसा प्रभावित रखाइन राज्य का दौरा कराया है. इसी राज्य में 25 अगस्त से सेना द्वारा रोहिंग्या विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई के बाद लाखों रोहिंग्या मुसलमानों को बांग्लादेश विस्थापित होना पड़ा है. संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस कार्रवाई को ‘जातीय सफाया’ जैसी घटना बताया था. उसके मुताबिक बांग्लादेश में इस समय रोहिंग्या शरणार्थियों की संख्या सात लाख तक पहुंच गई है, जिनमें 5.07 लाख शरणार्थी 25 अगस्त के बाद वहां पहुंचे हैं.

रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार अपना नागरिक नहीं, बल्कि अवैध प्रवासी मानता है. उसने 1982 में ही राष्ट्रीयता कानून बनाकर इनके ‘नागरिक दर्जे’ को खत्म कर दिया था. रोहिंग्या मुसलमानों को यहां पर अक्सर बौद्ध बहुसंख्यकों और सेना के अत्याचारों का सामना करना पड़ता है. इस मामले में कारगर पहल न करने की वजह से नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित म्यांमार की नेता आंग सान सू की को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना झेलनी पड़ रही है.