ख़ोर्दी एवोले स्पेनी टेलीविज़न जगत के एक जाने-माने पत्रकार हैं. वे इस बात से कभी सहमत नहीं थे कि कतालोनिया को स्पेन से अलग हो कर एक स्वतंत्र देश बन जाना चाहिये. लेकिन, कतालोनिया की प्रादेशिक सरकार द्वारा स्वाधीनता के लिए एक अक्टूबर को आयोजित जनमतसंग्रह के हिंसापूर्ण दमन को देख कर वे भी विचलित हो गये. ट्विटर पर अपनी चिंता जताते हुए उन्हेंने लिखा, ‘जनमतसंग्रह को रोकने का यह प्लान जिन लोगों ने बनाया है, वे संभवतः नहीं जनते कि उन्होंने कतालोनिया के शायद हमेशा के लिए हाथ से निकल जाने का रास्ता तैयार कर दिया है.’

स्पेन के प्रधानमंत्री मारियोनो राख़ोय और उनके सहयोगियों ने सोचा था कि वे केंद्र सरकार की पुलिस और अर्धसैनिक गार्ड (गुआर्दिया सिवील) कतालेनिया भेज कर जनमतसंग्रह को आसानी से कुचल देंगे. करीब सवा करोड़ मतपत्र पहले ही ज़ब्त कर लिये गये थे. डेढ़ हज़ार मतदान केंद्र भी सील कर दिये गये थे. तब भी, एक अक्टूबर वाले दिन कतालोनिया की प्रदेशिक सरकार और उसके समर्थक स्वयंसेवियों ने लगभग 4300 मतदान केंद्र खोल रखे थे. स्पेन की केंद्र सरकार के भेजे कुल क़रीब 30 हज़ार संघीय बलों से कहा गया था कि उन्हें स्कूलों आदि उन सब जगहों पर बलपूर्वक क़ब्ज़ा करना है, जहां मतदान बूथ होंगे. मतदान सुबह आठ बजे शुरू होने वाला था, इसलिए स्वयंसेवियों ने मतदान की व्यवस्था वाली जगहों को खुला रखने के दृढ़ निश्चय के साथ पिछली रात वहीं बितायी,

पुलिस ने निहत्थों को मारा-पीटा

अपनी भारी-भरकम यूनीफ़ॉर्म और साजोसामान के साथ अर्धसैनिक गार्डों ने सुबह नौ बजे इन मतदान केंद्रों पर धावा बोलना शुरू किया. उन्होंने मतदाताओं और मतदान केंद्रों पर तैनात स्वयंसेवकों को लातों-मुक्कों से मारा. हंटरों से पीटा, बाल पकड़ कर खींचा या ज़मीन पर गिरा कर घसीटा. एक जगह तो मतदाताओं की क़तार को सीढ़ियों पर से ढकेल कर नीचे गिरा दिया गया. बड़ों-बूढ़ों या औरतों-बच्चों की भी कोई परवाह नहीं की गई. कई जगहों पर रबर के छर्रों वाली गोलियां भी चलायी गयीं. इन दृश्यों के वीडियो पूरे स्पेन ने और बाक़ी दुनिया ने भी देखे. कतालोनिया को स्वतंत्रता मिले या न मिले, इन दृश्यों के वीडियो और चित्रों को देखने वालों से उसे जो समर्थन और सहानुभूति मिल रही है, वह स्पेन को बहुत महंगी पड़ सकती है. ये दृश्य कतालोनिया के स्वतंत्रता प्रेमियों की नैतिक विजय बन गये हैं.

कतालोनिया की प्रादेशिक सरकार का कहना है कि बलप्रयोग की इन निंदनीय घटनाओं में कुल 940 लोग घायल हुए. दो की स्थिति गंभीर है. प्रादेशिक सरकार का दावा है कि जनमतसंग्रह को विफल करने के स्पेन की केंद्र सरकार के सारे प्रयासों को झुठलाते हुए मताधिकार प्राप्त 42.3 प्रतिशत लोगों ने फिर भी मतदान किया. उनमें से 90.9 प्रतिशत ने कतालोनिया की स्वाधीनता के पक्ष में और केवल7.87 प्रतिशत ने विपक्ष में वोट डाले. तीन प्रतिशत मतपत्र या तो ख़ाली थे या अवैध थे.

निष्ठुर बलप्रयोग

प्रादेशिक सरकार के प्रमुख कार्लेस पुजेमोंत ने कहा कि यदि स्पेन की केंद्रीय सरकार ने जनमतसंग्रह में भारी पैमाने पर बाधा डालने की कोशिश न की होती, तो उसमें भाग लेने वालों का अनुपात कहीं बड़ा होता. इस मतदान से तीन सप्ताह पूर्व के एक मतसर्वेक्षण में कतालोनिया के केवल 41 प्रतिशत लोग प्रदेश की स्वतंत्रता के पक्ष में और 49 प्रतिशत उसके विरुद्ध थे. प्रेक्षकों का अनुमान है कि स्पेन की केंद्र सरकार ने अपने निष्ठुर बलप्रयोग से स्वतंत्रता-समर्थकों का अनुपात अब और बढ़ा ही दिया होगा.

बंद दरवाज़ों के पीछे अपनी गठबंधन सरकार के सहयोगियों के साथ परामर्श के बाद कार्लेस पुजेमोंत ने दो अक्टूबर को कहा कि जनमतसंग्रह का परिणाम उनके लिए ‘बाध्यकारी’ जनादेश है. अब कतालोनिया की विधानसभा को यह तय करना है कि स्पेन से अलग होने की घोषणा कब और कैसे होगी. जनमतसंग्रह संबंधी छह सितंबर की अपनी आज्ञप्ति में कार्लेस पुजेमोंत ने कहा था कि यदि जनता का समर्थन मिला, तो स्वतंत्रता की घोषणा जनमतसंग्रह का परिणाम आने के ‘48 घंटों के भीतर,’ यानी तीन अक्टूबर तक कर दी जायेगी. किंतु, परिणाम के बाद के उनके संयमित वक्तव्य से यही संकेत मिलता है कि स्वतंत्रता की घोषणा में अभी कुछ समय लग सकता है.

यूरोपीय संघ से मध्यस्थता की अपील

पुजेमोंत चाहते हैं कि यूरोपीय संघ स्पेन के साथ इस विवाद में मध्यस्थता करे. वे यह भी चाहते हैं कि स्पेन के उन लोगों के विरुद्ध कार्रवाई हो, जो जनमतसंग्रह के समय बलप्रयोग और हिंसा के लिए उत्तरदायी हैं. किंतु यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता का कहना था कि यह स्पेन का आंतरिक मामला है. उन्होंने कहा, ‘हम इतना ही कह सकते हैं कि बलप्रयोग राजनीति का माघ्यम नहीं हो सकता. यह समय एकता और स्थिरता का है, न कि टूटने और बिखरने का.’

स्पेन के प्रधानमंत्री मारियोनो राखोय भी अगले क़दमों के बारे में अपनी पार्टी के सहयोगियों से विचार-विमर्श कर रहे हैं. उनकी सरकार कतालोनिया के जनमतसंग्रह को असंवैधानिक, अवैध और अमान्य मानती है. स्पेन के सबसे प्रतिष्ठित दैनिक ‘एल पाईस’ ने अपने एक अग्रलेख में सारे घटनाक्रम के लिए कतालोनिया की प्रादेशिक सरकार को उत्तरदायी ठहराया, पर साथ ही यह भी लिखा कि माद्रिद की केंद्र सरकार भी सात वर्षों से कतालोनिया की कसमसाहट का कोई उत्तर ढूंढ नहीं पायी. अग्रलेख का शीर्षक था, ‘स्पेनी लोकतंत्र अपनी सबसे बड़ी चुनौती के सामने.’

श्रमिक संगठनों की आम हड़ताल

कातोलोनिया के कई श्रमिक संगठनों ने मंगलवार तीन अक्टूबर को स्पेन और उसकी पुलिस की ज़्यादतियों के प्रति अपना विरोध प्रकट करने के लिए आम हड़ताल का आह्वान किया है. सोमवार, दो अक्टूबर को, पूरे कतालोनिया में पुलिस ज्यादतियों की निंदा के प्रदर्शन हुए. कतालोनिया के विश्व-प्रसिद्ध बार्सेलोना फुटबॉल क्लब ने रविवार एक अक्टूबर का अपना एक मैच, विरोध प्रदर्शन के तौर पर, बिना दर्शकों वाले एक बंद स्टोडियम में खेला. स्पेन की अखंडता यदि अभी खंडित नहीं हुई है, तो बुरी तरह क्षतिग्रस्त अवश्य हो गयी है.

स्पेन की सरकार संविधान और संविधान व्याख्या न्यायालय की आड़ ले कर अपने अड़ियलपन को चाहे जितना सही ठहराए, न तो वह जनमतसंग्रह को रोक पायी और न दुनिया को दिखा पायी कि कतालोनिया की जनता का बहुमत स्वतंत्रता के पक्ष में नहीं है. यदि तीन सप्ताह पहले के मतसर्वेक्षण का यह परिणाम सही था कि वहां की केवल 41 प्रतिशत जनता स्वतंत्रता के पक्ष में है और 49 प्रतिशत विपक्ष में, तो स्पेनी सरकार बड़े ठाठ से कह सकती थी कि एक तो क्या, दस जनमतसंग्रह करवा लो, बहुमत तो हमारे साथ है! उसे अर्धसैनिक पुलिस भेजने, मतपेटियां छीनने और 900 से अधिक लोगों को घायल करने की कोई ज़रूरत ही नहीं थी.

बलप्रयोग अनावश्यक था

स्पेनी सरकार यदि आश्वस्त नहीं थी कि कतालान जनता का बहुमत उसके साथ है या नहीं, तब भी वह शांतिपूर्वक जनमतसंग्रह होने दे सकती थी. परिणाम विपरीत होने पर कह सकती थी कि हमारे हाथ बंधे हुए हैं, हम संविधान और सर्वोच्च न्यायालय के फ़ैसले की अवहेलना नहीं कर सकते. जनमतसंग्रह में विघ्न डालने के बाद अब वह यह दावा भी नहीं कर सकती कि जिन क़रीब 55 प्रतिशत लोगों ने मतदान नहीं किया, वे मतदान करना ही नहीं चाहते थे या कतालोनिया की स्वतंत्रता के विरोधी थे.

कतालोनिया में अब तक जितने भी स्वतंत्रता-समर्थक प्रदर्शन हुए हैं, भारतीय स्वाधीनता संग्राम के दिनों वाले सत्याग्रहों की तरह बड़े ही शालीन और शांतिपू्र्ण रहे हैं. स्पेनी सरकार की दूसरी बड़ी हार यह है कि वह अब किसी को यह पट्टी नहीं पढ़ा सकती कि जनमतसंग्रह के दिन वहां हुई हिंसा अलगाववादियों ने भड़कायी थी. अब, जब कि खून बह चुका है, खून का बदला खून से लेने का दुष्चक्र यदि चल पड़े, तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी और न इसे रोक सकना आसान होगा.

नये राष्ट्रों की उत्पत्ति हमेशा अवैध नहीं

स्पेन का संविधान देश के किसी हिस्से को अलग होने या अलग होने को लेकर जनमतसंग्रह कराने की अनुमति नहीं देता. संसार में शायद ही ऐसा कोई देश होगा, जिसका संविधान ऐसी अनुमति देता हो. इसलिए कातालोनिया वाले अपने जनमतसंग्रह को संवैधानिक अधिकार नहीं बता सकते. संविधान और क़ानून की दृष्टि से उनका जनमतसंग्रह अवैध ही था. तब भी, राष्ट्रों की उत्पत्ति संबंधी अंतरराष्ट्रीय क़ानून कुछेक शर्तों के साथ इसकी अनुमति देता है. इंडोनेशिया से अलग हो कर पूर्वी तिमोर का, इथियोपिया से अलग हो कर इरिट्रिया का और सूडान से अलग हो कर दक्षिणी सूडान का बनना इस तरह के कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जो बहुत पुराने नहीं हैं, स्वयं यूरोपीय संघ ने भी सर्बिया का हमेशा एक प्रदेश रहे कोसोवो को बल पूर्वक उससे अलग कर एक नया देश बनाया है. इन सब उदाहरणों में जनमत सर्वेक्षण या जनमतसंग्रह की प्रमुख भूमिका रही है.

कतालोनिया भी इसी तरह का एक तथ्य स्थापित करने में लगा है. हो सकता है, एक दिन उसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता भी मिलने लगे. स्पेन से अलग हो कर वह जल्द ही यूरोपीय संघ का सदस्य बनना चाहेगा, और तब, एक न एक दिन, स्पेन के साथ ही एक मेज़ पर बैठेगा. लेकिन, कतालोनिया यदि एक अलग देश बन भी गया, तब भी यूरोपीय संघ का तब तक सदस्य नहीं बन सकता, जब तक स्पेन उसकी सदस्यता का विरोध करता रहेगा.

यूरोपीय संघ की सदस्यता टेढ़ी खीर

यूरोपीय संघ की संधियों के अनुसार किसी नये देश को सदस्यता तभी मिल सकती है, जब बिना किसी अपवाद के सभी पुराने सदस्य एकमत से नये आवेदक का समर्थन करें. कातालोनिया के संदर्भ में स्पेन के पास वीटो का अधिकार होगा. इस समय स्थिति यह है कि यूरोपीय संघ का कोई भी देश छोटे-से कतालोनिया का समर्थन कर उससे कहीं बड़े और महत्वपूर्ण स्पेन की नाराज़गी मोल नहीं लेना चाहेगा. यही नहीं, फ्रांस, इटली और बेल्जियम जैसे देश, जो स्वयं अपने यहां पृथकतावादी आन्दोलनों का सामना कर रहे हैं, कभी नहीं चाहेंगे कि कतालोनिया को एक ऐसी सफलता मिले जो उनके पृथकतावादियों का मनोबल ऊंचा कर दे.

अधिकतर कतालोन यह मानते हैं कि उनके प्रदेशिक राजस्व का एक बड़ा हिस्सा स्पेन के राजकोष में चला जाता है. स्वतंत्र होने पर वह पूरी तरह उनके काम आयेगा. स्वतंत्र होने पर उनकी आर्थिक शक्ति ऑस्ट्रिया, डेनमार्क या नॉर्वे के बराबर होगी. उनकी प्रतिव्यक्ति आय इन देशों की प्रतिव्यक्ति आय के लगभग बराबर है. स्वतंत्र होने पर वे इस क्षमता का और विस्तार कर सकते हैं.

स्पेन से अलग होना यूरोपीय संघ से कट जाना है

दूसरी ओर यह भी सच है कि स्पेन से अलग होते ही कतालोनिया की अर्थव्यवस्था चरमराने भी लग सकती है. स्पेन से अलग होने का अर्थ है यूरोपीय संघ से भी कट जाना. तब, वह एक ही झटके में उन सारी व्यापारिक, परिवहन और सीमाशुल्क सुविधाओं से भी वंचित हो जायेगा, जो स्पेन की यूरोपीय संघ की सदस्यता के माध्यम से उसे इस समय मिली हुई हैं. यूरोपीय संघ वाले देशों की जिन कंपनियों के कतालोनियाई सरकार या कंपनियों के साथ जो भी अनुबंध हैं, वे कतालोनिया की क़ानूनी स्थिति बदलते ही निरस्त हो जायेंगे. स्पेनी सरकार का मानना है कि तब कतोलोनिया की अर्थव्यवस्था को 25 से 30 प्रतिशत की चपत लगेगी और वहां बेरोज़ारी की दर दोगुनी हो जायेगी.

हर सिक्के के हमेशा दो पहलू होते हैं. यदि कुछ मिलता है, तो कुछ खोना भी पड़ता है. लेकिन, बिना कुछ खोए कुछ मिलता भी नहीं! स्पेन और कतोलोनिया दोनों के सामने यही विडंबना है.