भारत ने कुछ दिन पहले म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं से सटी दो चेक पोस्ट फिर से खोल दी हैं. एक ख़बर के मुताबिक़ गृह मंत्रालय ने वैध रूप से म्यांमार से आने या वहां जाने वाले यात्रियों के लिए मिज़ोरम के लांगतलाई ज़िले में ज़ोरिपुई चेक पोस्ट खोलने का फैसला किया था. इसके अलावा बांग्लादेश से आने वाले या वहां जाने वाले यात्रियों के लिए मिज़ोरम के लुंगलेई ज़िले के कावरपुईछुआ चेक पोस्ट को खोल दिया गया.

लेकिन एक अक्टूबर, 2017 की इस ख़बर से पहले ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो चुका था. संदेह और दावा दोनों किए जा रहे हैं कि ये वीडियो म्यांमार से भागकर आए रोहिंग्या मुसलमानों का है जो अवैध रूप से भारत में घुस रहे हैं.

लेकिन इस वीडियो को लेकर कई सवाल हैं जो इसे लेकर मौजूदा फ़ेसबुकिया दावे पर सवाल खड़े करते हैं. पहला तो यह कि अगर यह वीडियो भारत में अवैध रूप से घुस रहे रोहिंग्या मुसलमानों का है, और पांच सितंबर (या उससे पहले भी) को ही इंटरनेट पर आ गया था तो सरकार, और ख़ास तौर पर मीडिया इस पर अब तक चुप क्यों है. वीडियो को लेकर मीडिया की इस असक्रियता से दूसरा सवाल पैदा होता है कि क्या यह वीडियो रोहिंग्या मुसलमानों का न होकर भारत की उत्तर-पूर्वी सीमा के जरिये यहां अवैध रूप से आ रहे बांग्लादेशियों का है. यह सवाल इसलिए कि कई सोशल मीडिया यूज़रों ने वीडियो पर कॉमेंट करते हुए कहा है कि उन्होंने यह वीडियो पहले भी देखा हुआ है और ये लोग रोहिंग्या नहीं बल्कि बांग्लादेशी मुसलमान हैं. इससे अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है कि यह वीडियो हालिया नहीं है.

एक संभावना और है. 25 अगस्त को म्यांमार की सेना की पोस्टों पर रोहिंग्या उग्रवादियों के हमला करने के बाद से रोहिंग्या मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा शुरू हो गई थी. उसके बाद लाखों रोहिंग्याओं को अपने घर छोड़कर बांग्लादेश आना पड़ा था. शुरू में बांग्लादेश ने रोहिंग्या लोगों को अपनी सीमाओं में आने से रोका था. बाद में संयुक्त राष्ट्र और तुर्की ने बांग्लादेश से अपील की थी कि वह इन लोगों को अपने यहां शरण दे. हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने यह भी कहा कि बांग्लादेश की रोक के बावजूद कुछ रोहिंग्या बांग्लादेशी सीमा के अंदर जाने में सफल हो गए हैं. ऐसे में संभव है कि यह वीडियो उसी दौरान या उसके बाद शूट किया गया हो. यानी यह वीडियो रोहिंग्या मुसलमानों का हो, पर भारतीय क्षेत्र का न हो. संयुक्त राष्ट्र की अपील के बाद ऐसे कई वीडियो और तस्वीरें सामने आए थे जिनमें रोहिंग्याओं को बांग्लादेशी सीमा में आते देखा जा सकता है. नीचे कुछ तस्वीरें दी गई हैं. ऊपर जो फ़ेसबुक पोस्ट आपने देखी, उसके उलट एक और पोस्ट है जिसमें दावा किया गया है कि ये वीडियो बांग्लादेश की सीमा में घुस रहे रोहिंग्या मुसलमानों का है. एक वीडियो पर दो दावे भी इसकी प्रामाणिकता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं.

सभी तस्वीरें: रॉयटर्स
सभी तस्वीरें: रॉयटर्स

भारत सरकार पहले ही कह चुकी थी कि वह अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को वापस म्यांमार भेजेगी. इस मामले की सुनवाई कोर्ट में चल रही है. ऐसे में इस तरह खुलेआम अवैध रूप से भारत की सीमा में रोहिंग्याओं का आना मुश्किल लगता है. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में आने से रोकने के लिए सुरक्षाबल मिर्ची वाला स्प्रे और बेहोश कर देने वाले हथगोले तक इस्तेमाल कर रहे हैं. एक हालिया न्यूज़ रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत ने रोहिंग्या मुसलमानों को देश में अवैध तरीके से घुसने से रोकने के लिए कड़े कदम उठाते हुए सीआरपीएफ और बीएसफ की अतिरिक्त तैनाती की थी. इसी रिपोर्ट में 23 सेक्टर असम राइफ़ल्स के उप महानिरीक्षक ब्रिगेडियर एमएस मोखा के हवाले से कहा गया कि मिज़ोरम में अब तक (यानी 15 सितंबर के आसपास तक) रोहिंग्या मुसलमानों की उपस्थिति की कोई सूचना नहीं है. जबकि हमने आपको ऊपर ही बताया है कि यह वीडियो पांच सितंबर या संभवतः उससे भी पहले सोशल मीडिया पर आया. एक और रिपोर्ट में सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक केके शर्मा ने कहा था कि बीएसएफ़ ने पिछले महीने भारत में घुसने वाले केवल 12 रोहिंग्याओं को पकड़ा था. उन्होंने कहा कि बीते दो महीनों में केवल 200 रोहिंग्या ही भारत में घुस पाए हैं.

लिहाज़ा वीडियो में दिख रहे लोग रोहिंग्या हैं या बांग्लादेशी, भारत की सीमा में घुस रहे हैं या बांग्लादेश की, इन सभी संभावनाओं को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि होने तक इस तरह के दावों को भ्रामक ही माना जाएगा. फिर भी अगर रोहिंग्या भारत में धड़ल्ले (जैसा वीडियो में दिख रहा है) से घुस रहे हैं तो ‘रोहिंग्या घुसपैठ’ का दावा करने से ज़्यादा महत्वपूर्ण सवाल तो हमारी सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बनता है कि कैसे इतनी सुरक्षा के बावजूद इतने रोहिंग्या मुसलमान कांटों वाली बाड़ तोड़कर भारत में घुस रहे हैं.