अमेरिका के टेक्सास राज्य में हुई गोलीबारी की घटना ने एक बार फिर पूरे अमेरिका को हिलाकर रख दिया है. हमलावर एक चर्च में घुसा और प्रार्थना कर रहे लोगों पर अंधाधुंध फायरिंग करने लगा. इस वारदात में 26 लोगों की जान चली गई. हाल ही में लास वेगस में हुए ऐसे ही एक हमले में 58 लोगों को अपनी ज़िंदगी खोनी पड़ी थी.

अमेरिका में जब भी इस तरह की घटनाएं होती हैं, एक विवादित मुद्दा फिर चर्चा में आ जाता है. यह है अमेरिका में बंदूकों की खुलेआम बिक्री. इस मुद्दे पर सीएनएन की एक रिपोर्ट बताती है कि क्यों अमेरिका में बंदूक ख़रीदना कोई मुश्किल काम नहीं है. यहां सैकड़ों की तादाद में स्टोर खुले हुए हैं जहां बंदूकें बेची जाती हैं. इनमें वॉलमार्ट जैसे बड़े शॉपिंग आउटलेट से लेकर छोटी-छोटी दुकानें भी शामिल हैं. यह सुनने में कुछ अजीब जरूर लग सकता है लेकिन पूरे अमेरिका में हर हफ़्ते के अंत में बंदूकों की प्रदर्शनी लगती है.

अमेरिका में आम लोग भी नियमित रूप से अपने पड़ोस से या परिवार के सदस्यों से बंदूकें ख़रीदते हैं. हथियारों के इस खुले लेन-देन में कोई जांच-पड़ताल नहीं होती. जांच केवल दुकान से बंदूक ख़रीदने पर ही होती है. दुकान में ख़रीदार की पृष्ठभूमि के बारे में पूछा जाता है. इस दौरान उन्हें बस एक फ़ॉर्म भरना होता है. इसमें ख़रीदार को अपना नाम, पता, जन्मतिथि और नागरिकता की जानकारी देनी होती है. हर अमेरिकी नागरिक का एक सामाजिक सुरक्षा नंबर होता है. फ़ॉर्म में इसे ‘विकल्प’ के तौर रखा गया है. यानी आप इसे भरें या ना भरें आपकी मर्ज़ी. फ़ॉर्म में कुछ सवालों के जवाब भी लिखने होते हैं जो कुछ इस तरह होते हैं...

क्या आपको कभी किसी बड़े अपराध में सज़ा मिली है?
क्या आपको घरेलू हिंसा के अपराध में सज़ा मिली है?
क्या आप क़ानून का पालन न करने वाले व्यक्ति हैं?
क्या आपको गांजा, उत्तेजक पदार्थ, नशीली दवाओं या नशा करने वाले अन्य पदार्थों की लत है?
क्या आप क़ानूनी रूप से भगोड़े हैं?
क्या आप कभी पागलख़ाने में रहे हैं?

ग्राहक द्वारा सभी जानकारी दिए जाने के बाद स्टोर अमेरिका की संघीय जांच संस्था एफ़बीआई से संपर्क करता है. एफ़बीआई अपने नेशनल इंस्टेंट क्रिमिनल बैकग्राउंड चेक सिस्टम (एनआईसीएस) पर संबंधित व्यक्ति का बैकग्राउंड चेक करती है. इस पूरी प्रक्रिया में केवल चंद मिनट लगते हैं. एनआईसीएस की चेकिंग में अगर व्यक्ति कोई बड़ा अपराधी निकलता है या किसी दुष्कर्म में दो साल की सज़ा पा चुका होता है, या फिर कोर्ट द्वारा मानसिक रूप से ‘दोषपूर्ण’ बताया गया है, तो वह अपनी पृष्ठभूमि की जांच में अयोग्य माना जाता है.

लेकिन इस तरह की अस्वीकृति कम ही देखने में आती है. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक़ ऐसे मामले केवल एक प्रतिशत हैं. इस बारे में एफ़बीआई की वेबसाइट पर लिखा है, ‘पिछले एक दशक में दस करोड़ लोगों के बैकग्राउंड की जांच की गई और इनमें से सात लाख से अधिक फ़ॉर्म अस्वीकार किए गए थे.’ यहां यह बात ध्यान रखने वाली है कि ऐसा केवल तभी होता है जब कोई व्यक्ति दुकान से बंदूक ख़रीदता है. बंदूकों की प्रदर्शनी में बंदूकें ख़रीदने पर ख़रीदार को अपने बैकग्राउंड की चेकिंग कराने की ज़रूरत नहीं पड़ती.

साल 2012 में कनेक्टिकट के स्कूल में हुए हत्याकांड के बाद पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने कार्यकाल में एक बिल के ज़रिए इन प्रदर्शनियों पर रोक लगाने की कोशिश की थी. लेकिन कांग्रेस (अमेरिकी संसद) में यह बिल पास नहीं हुआ. उस साल एक बंदूकधारी ने कनेक्टिकट के सैंडी हूक एलिमेंट्री स्कूल में 26 बच्चों और अध्यापकों की हत्या कर दी थी. ओबामा अपने कार्यकाल के अंत तक इस समस्या का समाधान नहीं ढूंढ पाए. इस मुद्दे पर बोलते हुए एक बार वे भावुक भी हो गए थे.

ओबामा का नाकाम प्रयास बताता है कि बंदूकों के व्यापार में लगे लोगों का देश की राजनीति में काफ़ी प्रभाव है. वास वेगस में हमले को अंजाम देने वाले स्टीफ़न पैडॉक के बारे में कहा गा था कि उसके कमरे से एक हैंडगन और 16 असॉल्ट राइफ़लें मिली हैं. पैडॉक अमेरिका के निवादा राज्य में रहता था. टेलिग्राफ़ की एक रिपोर्ट पढ़ने पर पता चलता है कि कैसे बंदूकों की ख़रीद को लेकर वहां के कमज़ोर क़ानून ने पैडॉक की मदद की. पैडॉक ने प्रतिबंधित डिवाइसों का इस्तेमाल कर अपनी सेमी-ऑटोमेटिक राइफ़लों को मशीन गन में तब्दील कर लिया. इसी का नतीजा था कि वह प्रति मिनट सैकड़ों गोलियां चला पा रहा था और इसी वजह से इस घटना में ज्यादा से ज्यादा लोग मारे गए और घायल हुए.