परमाणु हथियारों को खत्म करने के अंतरराष्ट्रीय अभियान इंटरनेशनल कैंपेन टू एबोलिश न्यूक्लियर वेपन्स (आईसीएएन या आईकैन) को साल 2017 के शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है. आईकैन 100 से ज्यादा देशों के गैर-सरकारी संगठनों का समूह है. नार्वे स्थित नोबेल पुरस्कार की चयन समिति ने कहा है कि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के विनाशकारी परिणामों की तरफ दुनिया का ध्यान खींचने और अंतरराष्ट्रीय संधि के जरिए इनके इस्तेमाल पर रोक लगाने के प्रयासों के लिए इस संस्था को चुना गया है.

शुक्रवार को ओस्लो में इसकी घोषणा करते हुए चयन समिति ने कहा कि आईकैन अंतरराष्ट्रीय संधि के जरिए परमाणु हथियारों पर रोक लगाने की मांग करने वाली दुनिया की प्रमुख संस्था है. उसने आगे कहा कि परमाणु हथियार मुक्त दुनिया का लक्ष्य हासिल करने के अगले कदम के तहत परमाणु हथियार संपन्न देशों को इसमें शामिल किया जाना चाहिए. चयन समिति ने 2017 के शांति के नोबेल पुरस्कार को परमाणु हथियार संपन्न देशों से दुनिया के 15 हजार परमाणु हथियारों को धीरे-धीरे खत्म करने की अपील बताया है.

आईसीएएन की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया से की गई थी, लेकिन इसकी आधिकारिक घोषणा 2007 में वियना में की गई. यह खुद को 100 से ज्यादा जमीनी संगठनों का समूह बताता है. चयन समिति ने 300 दावेदारों में से आईसीएएन का ऐसे समय में चयन किया है, जब उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और अन्य देशों के साथ उसका तीखा टकराव चल रहा है. इसके अलावा ईरान के साथ परमाणु संधि पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इसे सबसे खराब संधि बताए जाने के बाद गुरुवार को एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा है कि वे (डोनाल्ड ट्रंप) बहुत जल्द इस संधि को खत्म करने का फैसला ले सकते हैं. शायद इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए चयन समिति के एक सदस्य बेरिट राइस एंडरसन ने कहा कि पहले की तुलना में आज परमाणु हथियारों का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है.