सुप्रीम कोर्ट ने मृत्युदंड के तहत फांसी देने की जगह दूसरे विकल्पों पर विचार करने के लिए केंद्र को नोटिस जारी किया है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक केंद्र सरकार को इस पर तीन महीने में जवाब देना है. शीर्ष अदालत ने यह जवाब एडवोकेट ऋषि मल्होत्रा की याचिका पर मांगा है. इस याचिका कहा गया है कि अनुच्छेद-21 न केवल जीवन जीने का अधिकार देता है, बल्कि दोषी व्यक्ति को गरिमापूर्ण ढंग से मृत्युदंड पाने का भी अधिकार देता है.

याचिकाकर्ता ऋषि मल्होत्रा ने अपराध प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा-354(5) के तहत दोषियों को मिलने वाली फांसी की सजा को न केवल क्रूर, बल्कि संयुक्त राष्ट्र इकॉनॉमिक एंड सोशल काउंसिल के प्रस्ताव के खिलाफ बताया है. इस प्रस्ताव में कहा गया है कि जब भी किसी व्यक्ति को मौत की सजा दी जाए, वह कम से कम तकलीफ देने वाली होनी चाहिए.

शुक्रवार को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि भारतीय संविधान दयावान है और इसमें जीवन को पवित्र माना गया है. अदालत ने विधायिका को उन विकल्पों पर विचार करने की सलाह भी दी, जिनसे मौत की सजा पाने वाला व्यक्ति को कम से कम तकलीफ हो. अदालत का यह भी कहना था कि आधुनिक विज्ञान में मौत की सजा देने वाले दूसरे तमाम दर्दहीन विकल्प मौजूद हैं, इसलिए विधायिका को इन पर विचार करना चाहिए.