जीएसटी परिषद की शुक्रवार को हुई 22वीं बैठक में सरकार ने छोटे कारोबारियों को राहत देने वाले कई कदमों का ऐलान किया है. इसके तहत रिटर्न भरने में परेशानियों का सामना कर रहे छोटे कारोबारियों को सरकार ने राहत दी है. अब 1.5 करोड़ रु सालाना टर्नओवर वाले कारोबारियों को हर महीने तीन रिटर्न भरने के बजाय तीन महीने में एक बार रिटर्न भरना होगा. वहीं अब ‘कम्पोजिशन स्कीम’ की उच्चतम सीमा 75 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये कर दी गई है. सरकार ने आज निर्यातकों को भी बड़ी राहत दी है.

क्या है कंपोजिशन स्कीम?

कंपोजिशन स्कीम के तहत छोटे कारोबारियों को उनके कारोबार का एक से पांच फीसदी कर देकर लंबी प्रक्रिया से बचने का विकल्प दिया गया है. इसके तहत कारोबारियों को एक, विनिर्माताओं को दो और रेस्टोरेंट कारोबारियों को पांच फीसदी कर देना होता है. इसके बाद वे जीएसटी की लंबी प्रक्रिया का पालन करने से मुक्ति मिल जाती है. सितंबर अंत तक करीब 15 लाख कारोबारियों ने इस योजना को चुना है.

26 उत्पादों की कर दरों में कटौती की गई
जीएसटी परिषद ने ये भी फैसला लिया है कि दो लाख रु तक के सोने की खरीद पर अब पैन कार्ड की जरूरत नहीं होगी. साथ ही 26 वस्तुओं पर कर का बोझ घटा दिया गया है. इसमें खाने-पीने की कई वस्तुएं, स्टेशनरी जैसे उत्पाद शामिल हैं. एसी रेस्टोरेंटों के लिए टैक्स की दर को भी 18 से घटाकर 12 फीसदी कर दी गई है.

निर्यातकों को भी राहत मिली
बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि निर्यातकों को अगले छह महीने तक इंटीग्रेटेड जीएसटी यानी आईजीएसटी से छूट दी जाएगी. उन्होंने बताया कि तब तक निर्यातकों को केवल 0.1 फीसदी का कर चुकाना होगा. टैक्स रिफंड को लेकर निर्यातकों को हो रही परेशानियों के बारे में उन्होंने कहा कि उन्हें 10 अक्टूबर से जुलाई का और 18 अक्टूबर से अगस्त का रिफंड मिलना शुरू हो जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि परिषद ने उन्हें रिफंड देने के लिए अगले वित्त वर्ष यानी एक अप्रैल से ई-वालेट लॉन्च करने का ऐलान किया है.

ई-वे बिल व्यवस्था अगले वित्त वर्ष से
सरकार ने आज की बैठक में ‘ई-वे बिल’ व्यवस्था को एक अप्रैल, 2018 से शुरू करने का फैसला लिया है. इसके तहत 50 हजार रु से महंगे उत्पादों को राज्य या राज्य से बाहर ले जाने के पहले सरकार को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए बताना होगा. इसके लिए कारोबारियों को आॅनलाइन ई-वे बिल बनाना होगा. यह बिल दूरी के लिहाज से एक से 15 दिन तक मान्य होगा.

रिवर्स चार्ज पर अगली बैठक में ​फैसले की संभावना

दूसरी ओर सूत्रों का दावा है कि गैर-पंजीकृत वेंडरों से सौदे करने पर लगने वाले रिवर्स चार्ज से सरकार कुछ महीने के लिए छूट दे सकती है. ऐसे संकेत हैं कि जीएसटी परिषद की अगली बैठक में सरकार इस पर फैसला ले सकती है.

इससे पहले बुधवार को एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी नियमों में बदलाव का संकेत दिया था. प्रधानमंत्री ने कहा था कि जीएसटी काउंसिल से तीन महीने के अनुभव के आधार पर जीएसटी की समीक्षा करने और उसके हिसाब से सुधार करने को कहा गया है. गुरुवार को प्रधानमंत्री ने वित्त मंत्री अरुण जेटली और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात कर जीएसटी को लेकर आ रही मुश्किलों पर चर्चा भी की थी.