अंतरजातीय और धर्म से बाहर शादी करने वालों के लिए पुणे के पांच छात्रों ने एक कानून का ड्राफ़्ट तैयार किया है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ इस कानून का उद्देश्य किसी दूसरी जाति या धर्म के व्यक्ति से शादी करने वाले लोगों की रक्षा करना है. इन छात्रों ने यह ड्राफ्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजा है.

ड्राफ़्ट तैयार करने वाले इन पांच छात्रों में से चार क़ानून की पढ़ाई कर रहे हैं और एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट है. इनका दावा है कि देश में ऐसा कोई क़ानून नहीं है जो इस तरह की शादियों को सुरक्षा देता हो. उन्होंने कहा कि इन मामलों में पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले अन्य क़ानून इस तरह के मामलों के लिहाज से पर्याप्त नहीं हैं.

इस ड्राफ़्ट का शीर्षक ‘अंतर-जाति व अंतर-धर्म विवाह संरक्षण और कल्याण अधिनियम, 2017’ है. इसे तैयार करने में इन छात्रों को कई महीने लगे. उन्होंने बताया कि वे मौजूदा क़ानूनों पर कई घंटे शोध करते थे और मामलों का अध्ययन करते थे. इस दौरान उन्होंने मौजूदा क़ानूनों की (ऑनर किलिंग से संबंधित) कमज़ोरियों पर विचार-विमर्श किया.

ड्राफ़्ट पर बाते करते हुए एक छात्र भूषण रौत ने कहा, ‘अगर मर्जी से शादी करने वाले किसी दंपत्ति को परिवार द्वारा ज़बरदस्ती अलग किया जाता है और उनमें से कोई एक शिकायत दर्ज कराता है तो अपहरण का आरोप लागू हो जाता है. लेकिन यह अपहरण का मामला नहीं है, यह सम्मान के नाम पर नफ़रत में किया गया अपराध है. इसके लिए पूरी तरह एक अलग क़ानून की ज़रूरत है. हमने यह ड्राफ़्ट तैयार करने का फ़ैसला इसलिए किया कि कई रिपोर्टें दर्ज होने के बावजूद राज्य इस बारे में नहीं सोच रहा है. शायद हमारे ड्राफ़्ट के चलते वे इस दिशा में सोचें.’

यह ड्राफ़्ट पांच सेक्शन में है. पहले सेक्शन में तैयार किए गए मसौदे से संबंधित परिभाषाएं और उसके बारे में मूलभूत बातें बताई गई हैं. दूसरे सेक्शन में अपराध से निपटने, सज़ा देने और अंतर-जातीय और अंतर-धार्मिक विवाहों की सुरक्षा के बारे में लिखा गया है. तीसरे सेक्शन में एक समिति नियुक्त करने की बात कही गई है जबकि चौथे में इस तरह की शादियों को प्रोत्साहन देने के लिए योजनाओं का ज़िक्र है. पांचवें सेक्शन में स्थानीय निकाय संस्थानों की ज़िम्मेदारियों के बारे बताया गया है.