केरल के कथित लव जिहाद मामले में राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए शनिवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से कराने की जरूरत नहीं है. अदालत में दायर हलफनामे में राज्य सरकार ने कहा कि उसने मामले की जांच कराई है और इस दौरान कुछ भी ऐसा नहीं मिला जिसकी जांच एनआईए से कराई जाए. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच एनआईए से कराने का आदेश दिया था.

यह मामला अखिला अशोकन नामक हिंदू लड़की के इस्लाम कबूलकर हदिया बनने और शफीन जहां नाम के मुसलमान लड़के से विवाह करने से जुड़ा है. लड़की के पिता ने केरल हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में आरोप लगाया था कि उसकी बेटी का जबरन और धोखे से धर्मांतरण कराया गया है. उनकी मांग थी कि अखिला की इस शादी को अमान्य करार दिया जाए. केरल हाईकोर्ट ने मामले की राज्य पुलिस से जांच कराने के बाद पाया था कि इस शादी से जुड़ी परिस्थितियां संदेहास्पद हैं, लिहाजा उसने इस शादी को अमान्य करार दे दिया था. इसके बाद शफीन जहां ने इस फैसले को शीर्ष न्यायालय में चुनौती दी है. अभी सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है. हालांकि इस हफ्ते अदालत केरल हाईकोर्ट द्वारा इस शादी को अमान्य करार देने को गलत बता चुकी है. लेकिन यह मामला लव जिहाद का है या नहीं, इस पर अभी ​सुनवाई की जा रही है.

उधर एनआईए ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी प्राथमिक जांच रिपोर्ट में बताया कि ​हदिया का मामला अकेला नहीं है, जो संदेहास्पद है. उसके अनुसार केरल में ऐसी कई शादियां हुई हैं, जिनके घटनाक्रम हदिया के मामले से मिलते-जुलते हैं. वहीं जांच एजेंसी ने अदालत को सौंपी अपनी रिपोर्ट में इस मामले में राष्ट्रविरोधी तत्वों के शामिल होने से इनकार नहीं किया है. इसके बाद अदालत ने पूरे मामले की विस्तार से जांच का आदेश दिया है और हदिया का पक्ष सुनने की बात भी कही है.