भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन इस साल के अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार के लिए संभावित दावेदारों में शामिल हैं. अकादमिक और वैज्ञानिक अनुसंधानों का विश्लेषण करने वाली अंतरराष्ट्रीय फर्म क्लैरिवेट ऐनालिटिक्स ने यह दावा किया है. कंपनी ने इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के संभावित छह दावेदारों की जो सूची तैयार की है उसमें रघुराम राजन का भी नाम शामिल है. सोमवार को स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में इस अवॉर्ड की घोषणा की जानी है. यह सम्मान हर साल अर्थशास्त्र सहित छह क्षेत्रों में दिए जाते हैं.

वॉल स्ट्रीट जनरल के अनुसार रघुराम राजन को कॉरपोरेट फाइनेंस के क्षेत्र में काम के लिए इन दावेदारों में शामिल किया गया है. हालांकि उनकी दावेदारी कितनी पुख्ता है, इसके बारे में फर्म ने कोई रैंकिंग तैयार नहीं की है. रघुराम राजन दुनिया के बड़े अर्थशास्त्रियों में गिने जाते हैं. वे 2013 से 2016 तक आरबीआई के गवर्नर रह चुके हैं. इससे पहले रघुराम वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार थे. वे आईआईटी दिल्ली और आईआईम अहमदाबाद के छात्र रह चुके हैं. फिलहाल वे शिकागो में प्रोफेसर हैं.

रघुराम राजन का एक बड़ा योगदान 2008 की आर्थिक मंदी की भविष्यवाणी करने के रूप में माना जाता है. उन्होंने 2005 में अमेरिका में अर्थशास्त्रियों और बैंकरों के एक सम्मेलन में जब यह बात कही थी तो उनके इस दावे को गंभीरता से नहीं लिया गया. राजन ने तब ‘क्या वित्तीय विकास ने विश्व को खतरनाक बना दिया है’ नाम से अपना यह शोध प्रस्तुत किया था. उनका तर्क था कि दुनिया के वित्त बाजार विकसित होकर ज्यादा जटिल और असुरक्षित हो गए हैं. लेकिन उनकी इस बात पर आलोचकों ने कहा था कि वे नई अर्थशास्त्रीय खोजों का विरोध कर रहे हैं. हालांकि तीन साल बाद रघुराम राजन की आशंका सही साबित हुई और पूरी दुनिया मंदी की चपेट में आ गई थी.