‘आज के दौर में ज्ञान आधारित नहीं, बल्कि जरूरत आधारित इनोवेशन की जरूरत है.’

— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह बयान आईआईटी गांधीनगर में छात्रों से इनोवेशन (नवाचार) की संस्कृति विकसित करने की अपील करते हुए आया. उन्होंने कहा, ‘नवाचार का एक तरीका अकादमिक ज्ञान के जरिए नई चीजों की खोज करना है, जबकि दूसरा अपने आसपास की समस्याओं को देखकर उसका समाधान देना. नवाचार यह दूसरा तरीका बहुत बड़ा बिजनेस मॉडल बन सकता है.’ देश में डिजिटल साक्षरता को बढ़ाने की कोशिशों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जनधन, आधार और मोबाइल इसकी बुनियाद है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह भी कहना था कि सरल तकनीक को खोजते हुए डिजिटल साक्षरता को बढ़ाया जा सकता है.

‘केंद्र सरकार लोगों के भीतर सुलग रही आग को देखकर डर गई है’

— उद्धव ठाकरे, शिवसेना प्रमुख

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का यह बयान केंद्र सरकार द्वारा वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) की दरें घटाए जाने पर आया. उन्होंने कहा, ‘जनता की ताकत के सामने घमंडी से घमंडी शासकों को भी झुकना पड़ता है.’ जीएसटी में कटौती से 15 दिन पहले दिवाली आने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह कटौती दिवाली का उपहार नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि दिवाली पर लोग लक्ष्मी पूजन करते हैं, लेकिन केंद्र ने ज्यादा टैक्स लगाकर उन्हें लूटा है और उनके पास बहुत कम लक्ष्मी छोड़ी है. वहीं, एनडीए गठबंधन से अलग होने के बारे में भाजपा को चेतावनी देने के सवाल पर शिवसेना प्रमुख ने कहा कि वे इस बारे में किसी को चेतावनी नहीं देंगे, बल्कि जब सही लगेगा, फैसला कर लेंगे.


‘सरकारें यह नहीं तय कर सकतीं कि पर्यटक क्या खाएं या पियें?’

— अमिताभ कांत, नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ)

नीति आयोग सीईओ अमिताभ कांत का यह बयान राज्य सरकारों द्वारा खान-पान पर बंदिशें लगाने से पर्यटन उद्योग पर बुरा असर पड़ने की आशंका जताते हुए आया. उन्होंने कहा, ‘ऐसी पाबंदियां असंभव हैं. लोग क्या खाएंगे या पिएंगे, यह लोगों का निजी मामला है, यह तय करना सरकारों का काम नहीं है.’ देश में पर्यटन उद्योग के विस्तार के सवाल पर अमिताभ कांत ने कहा कि भारत में देखने लायक तमाम ऐतिहासिक जगहें है, लेकिन उन्हें स्वच्छ बनाने पर ध्यान देना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि पर्यटक आराम करने और थोड़ा सुकून पाने के लिए आता है, इसलिए भारतीय संस्कृति के संदर्भ में उसे ऐसा ही यादगार माहौल देने की कोशिश होनी चाहिए.


‘अरुणाचल प्रदेश में रहने वाले तिब्बती शरणार्थी भारतीय नागरिकता नहीं मांग रहे हैं.’

— पेमा खांडू, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने यह बात अरुणाचल प्रदेश में तिब्बती शरणार्थियों की संख्या में गिरावट आने की जानकारी देते हुए कही. उन्होंने कहा कि ज्यादातर तिब्बतियों को विकसित देशों में रोजगार और रहने की सुविधा मिल रही है, इसलिए वे राहत शिविरों को छोड़कर जा रहे हैं. चकमा और हाजोंग शरणार्थियों को नागरिकता देने के सवाल पर पेमा खांडू ने कहा कि सुप्रीम के आदेश पर 2,000 आवेदन आए थे, लेकिन उनमें कोई भी उपयुक्त नहीं पाया गया. उन्होंने यह भी कहा कि इन्हें नागरिकता के बारे में केंद्र को फैसला करना है, लेकिन राज्य सरकार बगैर इनर लाइन परमिट के इन्हें राज्य में कोई अधिकार न देने की अपनी बात पर अडिग है.


‘दसियों डोनाल्ड ट्रंप मिलकर भी ईरान से परमाणु समझौते का लाभ नहीं छीन सकते.’

— हसन रूहानी, ईरान के राष्ट्रपति

राष्ट्रपति हसन रूहानी का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा परमाणु समझौते को लेकर अपने चुनावी वादे से पीछे हटने और इसकी जगह ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने पर आया. उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका कभी इस समझौते को मानने से इनकार करेगा तो दुनिया केवल उसकी आलोचना करेगी, न कि ईरान की. 2015 में अमेरिका सहित अन्य वैश्विक शक्तियों और ईरान के बीच परमाणु समझौता हुआ था. इसके तहत ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम रोक दिया था, बदले में उस पर लगे प्रतिबंध हटा लिए गए थे. पिछले साल राष्ट्रपति चुनाव के दौरान डोनाल्ड ट्रंप कहा था कि अगर वे जीते तो ईरान के साथ परमाणु समझौते को खत्म कर देंगे.