हाल में केंद्र सरकार ने वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) के तहत आनेवाले कुछ उत्पादों की दरों में कटौती की थी. अब ख़बर है कि सरकार जीएसटी की सबसे ऊंची दर (28 प्रतिशत) के तहत आने वाले कुछ उत्पादों की संख्या घटा सकती है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ रोज़ाना इस्तेमाल की चीज़ों पर 28 प्रतिशत टैक्स लगने के चलते लोगों को हो रही परेशानियों को देखते हुए वित्त राज्य मंत्रियों की ओर से की गई शिकायतों के बाद ऐसा किया जा सकता है.

दो वित्त राज्य मंत्रियों ने अख़बार को बताया कि बाथ फिटिंग्स के साथ-साथ सीमेंट और रॉड जैसे स्टील उत्पाद ज़्यादा टैक्स वाले स्लैब में हैं. एक मंत्री के मुताबिक मूल सोच यह थी कि वस्तुओं और सेवाओं को जरूरत और शौक के हिसाब से अलग-अलग किया जाए, लेकिन हम उससे आगे चले गए. उन्होंने कहा कि यह (28 प्रतिशत टैक्स) बहुत ज़्यादा है और इसे कम करने की ज़रूरत है.

एक और राज्य मंत्री ने कहा कि जीएसटी परिषद की गुवाहाटी में होने वाली अगली मुलाक़ात में इस मुद्दे पर बात होने की उम्मीद है. शनिवार को केंद्रीय उत्पाद और सीमा शुल्क (सीबीआईसी) बोर्ड के अधिकारियों ने भी कहा था कि 28 प्रतिशत वाले स्लैब में काफ़ी ज़्यादा आइटम रखे गए हैं. सरकार के कुछ अधिकारियों का कहना है कि 28 प्रतिशत टैक्स के चलते टैक्स चोरी को भी बढ़ावा मिल रहा है. उनके मुताबिक इसके चलते व्यापारी ख़रीदारों को कैश में भुगतान करने की सलाह देते हैं जिसमें कोई रसीद नहीं दी जाती.

इसके अलावा सरकार ने राज्यों के वित्त मंत्रियों का एक पैनल बनाने की घोषणा की है जो अलग-अलग श्रेणियों वाले भोजनालयों के लिए तय की गई टैक्स व्यवस्था की समीक्षा करेगा. फ़िलहाल इन्हें केवल खाना खिलाने वाले भोजनालयों और पांच सितारा होटलों के रूप में 12 से 18 प्रतिशत वाले जीएसटी टैक्स स्लैब में रखा गया है.