सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पटाखों की बिक्री पर लगी रोक बढ़ाने का फैसला किया है. यहां अब एक नवंबर तक पटाखों की बिक्री नहीं हो सकेगी. पिछले साल दिवाली के बाद एनसीआर में लोगों को कई दिनों तक धुंध और प्रदूषण के चलते स्वास्थ्य से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. इसकी वजह पटाखों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल बताया गया था. सोशल मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लेकर भारी बहस चल रही है.

यहां एक बड़े तबके ने इसका समर्थन किया है. शिवा चेरुकी ने ट्विटर पर लिखा है, ‘... मेरे ख्याल से इस फैसले पर पटाखे फोड़कर खुशी मनानी चाहिए.’ वहीं दूसरी तरफ इस फैसले को हिंदू विरोधी बताते हुए कई तीखी टिप्पणियां भी आई हैं. अंग्रेजी के चर्चित लेखक चेतन भगत ने इस मामले पर एक के बाद कई ट्वीट किए हैं. एक में उनका कहना है, ‘दिवाली पर पटाखों पर पाबंदी वैसी ही है जैसे क्रिसमस के दिन क्रिसमस ट्री और बकरीद के दिन बकरे पर पाबंदी लगा दी जाए. नियम बनाइए, पाबंदी मत लगाइए. परंपराओं का सम्मान कीजिए.’

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह ने न्यूज वेबसाइट द वायर और इसके संपादक, मालिक और इसमें उन पर रिपोर्ट लिखने वालीं रिपोर्टर के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज करा दिया है. यह मामला अहमदाबाद की एक अदालत में दर्ज करवाया गया है. इस वेबसाइट पर रविवार को रोहिणी सिंह की एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी. इसके मुताबिक नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जय शाह की एक कंपनी की संपत्ति में 16 हजार गुना की बढ़ोत्तरी हुई थी. रिपोर्ट के मुताबिक 50 हजार रुपये की पूंजी से शुरू हुई कंपनी एक साल में तकरीबन 80 करोड़ रुपये की हो गई थी. सोशल मीडिया पर आज की इस अपडेट के साथ यह खबर छाई हुई है और इसके बहाने यहां आरोप-प्रत्यारोपों का दौर जारी है.

यहां कई लोगों ने आरोप लगाया है कि मुख्यधारा का मीडिया इस मुद्दे को तवज्जो नहीं दे रहा है. प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण ने ट्वीट करके कहा है कि मुख्यधारा के मीडिया ने जिस तरह इस मुद्दे को कवर किया है वह मीडिया की हालत बताता है. यहां कुछ लोग अमित शाह के पालतू हैं तो कुछ उनसे डरे हुए हैं. वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई की टिप्पणी है, ‘मैं देख रहा हूं कि तकरीबन हर चैनल अपने प्राइम टाइम पर एक स्टोरी से बचने की भरसक कोशिश कर रहा है! ‘नए’ मीडिया की जय हो!’

इन दोनों मुद्दों पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :

वीएम |‏ @vm4839

दिल्ली-एनसीआर में सुप्रीम कोर्ट के रूप में औरंगजेब की वापसी हो गई है. सन 1667 में औरंगजेब ने दिवाली के दिन पटाखों पर पाबंदी लगाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में लगाई है.

शकुनि मामा | @ShakuniUncle now

अस्थमा धर्मनिरपेक्ष है इसलिए दिल्ली में पटाखों पर पाबंदी को हिंदू विरोधी नहीं कहा जा सकता.

कृष्ण पांडे | @pridekrishna

पटाखों (की बिक्री) पर सुप्रीम कोर्ट की पाबंदी को कुछ इस तरह समझा जा सकता है :

रमेश श्रीवत्स | @rameshsrivats

इस दिवाली को दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री नहीं होगी. क्यों न सुप्रीम कोर्ट उत्सव बनाम प्रदूषण पर कोई फैसला कर दे? इसके बाद चुने हुए प्रतिनिधियों की भूमिका क्या रह जाएगी?

गप्पिस्तान रेडियो | @GappistanRadio

सुप्रीम कोर्ट ने जय अमित शाह के मामले से ध्यान हटाने के लिए पटाखों की बिक्री पर पाबंदी का फैसला किया है.

संजीव भट्ट (आईपीएस) | @sanjivbhatt

जब रोहिणी सिंह ने वाड्रा पर स्टोरी की थी तब भाजपा ने उसे हाथों-हाथ लिया था. अब जब उन्होंने जय अमित शाह पर स्टोरी की है तो उनके खिलाफ मानहानि का केस ठोक दिया गया है.

राजीव जैन | @gallerygrandeur

जय शाह ‘जादा’ खा गया. नरेंद्र मोदी देश आप से जानना चाहता है कि आप चौकीदार हैं या भागीदार? कुछ तो बोलिये और अपना कथित 56 इंच का सीना दिखाइए.