केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की ‘स्टैंड अप इंडिया’ योजना भी फ्लॉप होने के रास्ते पर चल पड़ी है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इस योजना से जुड़े आंकड़े अब तक कुछ इसी तरह के संकेत दे रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच अप्रैल 2016 को उत्तर प्रदेश के नोएडा से इस योजना को पूरे देश के लिए शुरू किया था. तब से अब तक 17 महीने बीत चुके हैं. लेकिन इस योजना के तहत बैंकों को जो लक्ष्य दिया गया था उससे वे पीछे हटते दिख रहे हैं.

अख़बार के मुताबिक योजना शुरू करते वक़्त सभी बैंकों से कहा गया था कि जहां कहीं भी उनकी शाखा हो उसके दायरे में आने वाले एक दलित या आदिवासी युवा और कम से कम एक महिला को इसके तहत कर्ज़ ज़रूर दिया जाए. ताकि वे इस रकम से कोई काम-धंधा शुरू कर सकें. लेकिन अब तक के आंकड़े बताते हैं कि बैंकों ने इस दिशा में उत्साह नहीं दिखाया है. उन्होंने न तो दलित-आदिवासी युवाओं को पर्याप्त कर्ज़ दिया है और न महिलाओं को.

आंकड़ों के हिसाब से देखें तो पूरे देश में विभिन्न बैंकों की लगभग 1.3 लाख शाखाएं हैं. लेकिन इनमें से महज़ छह फीसदी शाखाओं ने ही दलित या आदिवासी युवाओं को स्टैंड अप इंडिया योजना के तहत कर्ज़ दिया है. महिलाओं के मामले में यह आंकड़ा थोड़ा ज्यादा है लेकिन बहुत बेहतर इसे भी नहीं कहा जा सकता. बैंकों ने अब तक सामान्य श्रेणी की सिर्फ 25 फीसदी महिलाओं को ही कर्ज़ देने के लायक समझा है.

अख़बार ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय से सूचना के अधिकार के तहत जानकारी हासिल की है. इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के 21, निजी क्षेत्र के नौ और 42 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के आंकड़े शामिल हैं. इनके मुताबिक योजना के तहत कर्ज़ के लिए 5,852 दलित, 1,761 आदिवासी और सामान्य श्रेणी की 33,321 महिलाओं ने आवेदन किया. बैंकों ने कुल 8,803 करोड़ रुपए के कर्ज़ को मंज़ूरी दी है. लेकिन सिर्फ 4,852 करोड़ रुपए ही बांटा गया है.