कॉलेज रैगिंग को लेकर आईआईटी-कानपुर ने सख़्त क़दम उठाया है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ संस्थान ने 16 छात्रों को तीन साल और छह स्टूडेंटों को एक साल के लिए निकाल दिया है. ये सभी अपने निलंबन की अवधि पूरी होने के बाद ही वापस पढ़ाई के लिए लौट सकेंगे.

आईआईटी-कानपुर के निदेशक प्रोफ़ेसर इंद्रानिल मन्ना और उप-निदेशक प्रोफ़ेसर मनिंद्रा अग्रवाल की उपस्थिति में संस्थान की सीनेट ने यह फ़ैसला किया. हालांकि उसने पुलिस में शिकायत नहीं करने का फ़ैसला किया क्योंकि इससे निलंबित स्टूडेंटों का भविष्य चौपट हो जाता. अख़बार से बात करते हुए प्रोफ़ेसर अग्रवाल ने कहा, ‘इन छात्रों को कैंपस में रहने की अनुमति नहीं होगी और वे निलंबन ख़त्म होने के बाद ही वापस आ सकेंगे. आज लिए गए इस फ़ैसले से छात्रों में संदेश जाएगा कि रैगिंग नहीं करनी है और शिष्टाचार बनाए रखना है.’

जुलाई में संस्थान में आए नए छात्रों ने आरोप लगाया था कि उनके सीनियरों ने ज़बरदस्ती उनके कपड़े उतरवाए और अश्लील हरकतें करने को मजबूर किया. संस्थान के एक प्रोफ़ेसर ने इस घटना को लेकर एक ब्लॉग भी लिखा था. इसके बाद संस्थान प्रशासन मामले को दबा नहीं सका और उसे कार्रवाई करनी पड़ी. अगस्त में एक सामूहिक शिकायत दर्ज कराई गई. संस्थान की जांच समिति ने आरोपों को सही पाया और सभी 22 आरोपितों को निलंबित करने की सिफ़ारिश की जिसे स्वीकार कर लिया गया.