किसी यात्री विमान में अगर शहीद सैनिकों के शव ले जाए जा रहे हैं तो यात्रियों को उनके सम्मान में 30 सेकंड का मौन रखना पड़ेगा. सेना ने इस बाबत नागरिक उड्‌डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) काे एक प्रस्ताव भेजा है. इसे जल्दी ही मंज़ूरी मिलने की संभावना है.

द इकॉनॉमिक टाइम्स के मुताबिक डीजीसीए ने यह प्रस्ताव सभी एयरलाइंस को भेजा है. ताकि इस पर उनकी राय ली जा सके. एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया, ‘फैसले से पहले हम सभी एयरलाइंस की सहमति लेना चाहते हैं. और हमें उम्मीद है कि उनकी सम्मति मिल जाएगी.’ डीजीसीए ने इसके साथ ही शहीदों के संबंध में उड़ान के दौरान की जाने वाली उद्घोषणा का मसविदा भी एयरलाइंस को भेजा है.

सूत्रों के मुताबिक यह उद्घोषणा कुछ इस तरह हो सकती है, ‘यह हमारे लिए गौरव तथा सम्मान की बात है कि आज हमारे साथ सेना/वायु सेना/नौ सेना के साहसी और बहादुर शहीद सैनिक...(नाम)...की पार्थिव देह भी ले जाई जा रही है. हम आपसे आग्रह करते हैं कि उनके सम्मान में 30 सेकंड का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दें.’ डीजीसीए के एक अधिकारी के मुताबिक यह उद्घोषणा का शुरुआती मसविदा है. विभिन्न एयरलाइंस के प्रस्तावों के आधार पर इसे अंतिम रूप दिया जाएगा.’

हालांकि डीजीसीए के इस कदम से कई एयरलाइंस स्तब्ध भी बताई जाती हैं. इंडिगो एयरलाइंस और एयर इंडिया के पूर्व संचालन प्रमुख तथा वर्तमान में उड्‌डयन विश्लेषक के तौर पर सक्रिय शक्ति लुंबा कहते हैं, ‘हम तो पहले ही शहीद सैनिक को समुचित सम्मान देते हैं. शहीदों के शव कई साल से यात्री विमानों से ले जाए जा रहे हैं. उन्हें ले जाए जाने की प्रक्रिया में एयरलाइंस स्टाफ सहित जितने लोग भी शामिल होते हैं वे उनके सम्मान का पूरा ध्यान रखते हैं.’

एक अन्य एयरलाइंस के अफसर भी नाम न छापने की शर्त पर यही बात कहते हैं. उनके मुताबिक, ‘किसी शहीद सैनिक का शव विमान में रखने से पहले एक छाेटा सा सम्मान समारोह होता है. इसके बाद उनका शव विमान में चढ़ाया जाता है. हम कई नियमों से आगे जाकर भी उनका सम्मान करते हैं. बस अभी फ्लाइट के दौरान उद्घोषणा नहीं की जाती.’ फिर वे आगे जोड़ते हैं, ‘लगता है डीजीसीए इन दिनों अपने सभी कामों में राष्ट्रवादी रंग देने पर ज़्यादा ध्यान दे रहा है.’