‘बोलहु सुआ पियारे-नाहां, मोरे रूप कोइ जग माहां? सुमिरि रूप पदमावति केरा, हंसा सुआ, रानी मुख हेरा’

रानी पद्मावती से जुड़े किस्सों में एक मशहूर किस्सा रानी नागमती का भी शामिल है. यह कुछ यूं है कि आइने में खुद को निहारते हुए वो अपने पालतू तोते से पूछती हैं कि क्या दुनिया में कोई उनसे भी ज्यादा सुंदर है. जवाब में तोता रानी पद्मावती को याद करते हुए हंसने लगता है और रानी हैरान रह जाती है. इस किस्से को अवधी के कवि मलिक मोहम्मद जायसी ने अपने महाकाव्य पद्मावत में ऊपर लिखी लाइनों के जरिए बताया है. जायसी जिस रानी पद्मावती को अपने महाकाव्य में कभी न भुलाया जा सकने वाला किरदार बनाकर चले गए हैं, उस किरदार को सिनेमा के परदे पर जीता-जागता दिखाने की जिम्मेदारी लेखक-निर्देशक-संगीतकार संजय लीला भंसाली ने उठाई है.

रानी पद्मावती के असली या कल्पनिक किरदार होने की बहस में पड़े बिना आगे बात करें तो बेहिचक कहा जा सकता है कि यह ट्रेलर इस नाम से जुड़ी भव्यता को तमाम किंवदंतियों के साथ समेटते हुए दिखाता है. महलों के भव्य और मरुस्थल वाले रास्तों के विहंगम दृश्य, राजपूतों और खिलजियों के भारी-भरकम लाव लश्कर, गहनों से लेकर अस्त्र-शस्त्र तक सब रोमांच और मनोरंजन का हैवी डोज मिलने की तस्दीक करते हैं. ट्रेलर फिल्म के तीनों मुख्य किरदारों को आपको जी-भर के देखने देता है, लेकिन कथानक कैसा होगा इसका जरा भी अंदाजा नहीं देता. यह तरीका दो वजहों से समझदारी भरा ही कहा जा सकता है. पहली वजह यह कि रानी पद्मावती का किस्सा ज्यादातर लोगों को मालूम है. दूसरी, शूटिंग के समय से ही फिल्म को लेकर हुए विवादों के चलते कहानी जितनी छिपाई जा सके उतना ही अच्छा है.

ट्रेलर देखते हुए हम एक साथ ही पहले ऊपर बताए किस्से के तोते की तरह मुग्ध और फिर रानी नागमती की तरह अचंभित भी होते हैं. इस अचंभे का कारण यह है कि ये झलकियां जो रानी पद्मावती के किस्से का हिस्सा होने का दावा करती हैं, उनमें रानी और रावल रतन सिंह दोनों मिलकर भी तीसरे किरदार जितना प्रभाव पैदा नहीं कर पा रहे हैं. शानदार सिनेमैटोग्राफी का नमूना बनने जा रही इस फिल्म की झलकियां देखते हुए हर फ्रेम भंसाली की नजर पर सैकड़ों बार वाह-वाह कहने को मजबूर करता है. विजुअल और संगीत आपके रोयें-रोयें को आनंद से सिहरा ही रहा होता है कि आपको एक चीज खटक जाती है - कास्टिंग.

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रानी पद्मावती बनकर दीपिका पादुकोण न तो उतनी सुंदर नजर आती है और न ही उतनी आभामय. भारी-भरकम लहंगों और गहनों से बिगड़ी उनकी चाल का बनावटीपन रानी सा की जगह वेरोनिका (कॉकटेल में दीपिका का किरदार) सा ही लगता है. यहां आशंका होती है कि बतौर अभिनेत्री कहीं उनके लिए यह किरदार भी ‘बाजीराव-मस्तानी’ की मस्तानी का एक्सटेंशन होकर न रह जाए. कुल मिलाकर इस किरदार की लीगेसी को सामने लाने के लिए जिस चेहरे की दरकार थी, वह दीपिका तो बिल्कुल नहीं हैं. लगभग यही शिकायत हमें रावल रतन सिंह बने शाहिद कपूर से भी होती है. वे न तो चेहरे के ओज से और न ही आवाज के जोर से रावल की उपस्थिति का आभास करवा पाते हैं. दीपिका के साथ उनके रूमानी दृश्यों में भी दोनों के चेहरों पर फीकापन बना ही रहता है.

ट्रेलर में जिसे देखकर आप आह और वाह एक साथ करते हैं, वो हैं अलाउद्दीन खिलजी बने रणवीर सिंह. रावल-रानी के जो किरदार दीपिका और शाहिद निभा रहे हैं, उस तरह के किरदार सिनेमाई परदे पर कई बार देखे गए हैं. उनके पास इसे करने के लिए कई रेफरेंस रहे होंगे फिर भी दोनों उतने सहज नहीं लग रहे हैं. वहीं अलाउद्दीन खिलजी का पात्र नया होते हुए भी रणवीर सिंह जिस एनर्जी और स्टाइल में उसे निभाते नजर आ रहे हैं, आपको यकीन होने लगता है कि खिलजी ऐसा ही रहा होगा. संजय लीला भंसाली ने जैसे इस किरदार को फिल्माया है और जिस तरह से यह ट्रेलर में जान डाल देता है उससे लगता है कि इस फिल्म का ज्यादा सूटेबल टाइटल पद्मावती की जगह अलाउद्दीन खिलजी ही होता.

ट्रेलर जो बात सबसे ज्यादा दम लगाकर कहता है, वो यह कि ‘बाहुबली – द कनक्लूजन’ के बाद यह साल की दूसरी विजुअल ट्रीट होने जा रही है. शूटिंग शुरू होने के साथ शुरू हुए विवादों से लेकर ट्रेलर रिलीज के बाद सोशल मीडिया पर चल रहे मीम्ज तक फिल्म को ढेर सारा प्रमोशन पहले ही दिला चुके हैं. अब बस एक दिसंबर को फिल्म रिलीज के साथ रानी पद्मावती को महाकाव्य से महासिनेमा में उतरते देखने का इंतजार है.