1996 के सोनीपत बम धमाके के मामले में सोनीपत की एक अदालत ने आरोपित अब्दुल करीम टुंडा को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है. अदालत ने सोमवार को टुंडा को धमाके का दोषी ठहराया था. मंगलवार को उसे उम्र क़ैद की सज़ा सुनाते हुए अदालत ने उसे विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की हरेक धारा 307, 120बी और धारा तीन के तहत 50-50 हज़ार रुपये जुर्माना भरने का भी आदेश दिया है. 28 दिसंबर, 1996 को सोनीपत में हुए दो बम धमाकों में कई लोग घायल हो गए थे.

अब्दुल करीम टुंडा को लश्कर-ए-तयैबा का बम विशेषज्ञ माना जाता है. उसे दिल्ली पुलिस ने 16 अगस्त, 2013 को भारत-नेपाल सीमा पर बनबसा इलाक़े से गिरफ़्तार किया था. वह उन 20 आतंकवादियों में शामिल है जिन्हें मुंबई हमलों के बाद भारत के हवाले करने के लिए पाकिस्तान से अपील की गई थी. देश के 40 बम धमाकों से जुड़े मामलों में टुंडा संदिग्ध है. इनमें 1993 में मुंबई में हुए सीरियल बम धमाके और 1996 से 1997 के बीच हुए हमले भी शामिल हैं. ख़ुफ़िया अधिकारियों का मानना है कि टुंडा की 2010 के कॉमनवेल्थ खेलों के आयोजन के दौरान भी हमला करने की योजना थी, लेकिन उसके दो सहयोगियों के गिरफ़्तार होने की वजह से वह योजना असफल हो गई.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पिलखुआ का रहने वाला करीम टुंडा एक होम्योपैथ चिकित्सक था. 80 के दशक में वह चरमपंथियों के संपर्क में आया और इसके बाद उसने बम बनाना सीखा. टुंडा पर यह भी आरोप है कि वह लश्कर और जमात-उद-दावा के लिए पैसा जुटाता था. साथ ही उसके पाकिस्तान में दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क से संबंध होने की बात भी कही जाती है. लश्कर के लिए टुंडा युवाओं की भर्ती कराने का काम करता था. वह उन्हें धर्म के नाम पर भड़काता था. बताया जाता है कि उसकी सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बांग्लादेश और नेपाल जैसे कई देशों तक पहुंच थी.