नुकसानदेह सामाजिक परंपराओं को दूर करने में अति न्यायिक सक्रियता शायद ही कभी कारगर साबित होती हो. यहां हम दीपावली पर पटाखे फोड़े जाने की परंपरा की बात कर रहे हैं. बीते सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पटाखों की बिक्री पर पाबंदी लगाने का फैसला किया है. ऐसी परंपराएं कारगर तरीके से तब दूर हो सकती हैं जब न्यायपालिका जनता के स्वास्थ्य का हवाला देते हुए इसकी जिम्मेदारी कार्यपालिका यानी सरकार पर डाले.

उस दौर में जब आबादी का घनत्व कम था, बसाहटें दूर-दूर थीं और लोगों के पास पटाखों पर खर्च करने के लिए सीमित पैसा होता था, तब पटाखे फोड़ने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता था. लेकिन आज स्थितियां पूरी तरह पलट चुकी हैं. पटाखों से होने वाला प्रदूषण अब घातक स्तर पर पहुंच चुका है. इस लिहाज से लोगों को पटाखे छोड़ने के अपने शौक पर लगाम लगानी चाहिए.

लोग पटाखों से जुड़े नुकसान को समझें और इनका कम से कम इस्तेमाल करें इसके लिए जागरूकता अभियानों की ही जरूरत है. इसके साथ ही पटाखों से जुड़े कुछ नियम भी बनाए जा सकते हैं. इन्हें समाज स्वीकार करता है. लेकिन पटाखों पर पाबंदी जैसे अचानक दिए गए फैसलों का एक नतीजा यह होता है कि ये लागू नहीं हो पाते और जाहिर है कि इससे संबंधित प्राधिकरण (इस मामले में सुप्रीम कोर्ट) की ही मानहानि होती है.

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पटाखों की बिक्री पर पाबंदी से जुड़ा फैसला नवंबर, 2016 में दिया था. फिलहाल इस पाबंदी को आगे बढ़ाया गया है. लेकिन एक महीने पहले अदालत ने पिछले साल के अपने फैसले में यह व्यवस्था दी थी कि बिक्री पर धीरे-धीरे पाबंदी लगाई जाएगी. दुकानों के लायसेंसों के साल दर साल कम किया जाएगा.

लेकिन अब एक नवंबर तक पूर्ण पाबंदी लगा दी गई ताकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दीपावली के बाद दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण के स्तर का अध्ययन कर सके. लेकिन यहां एक सवाल ये है कि जिन दुकानदारों ने कुछ दिन पहले बड़ी मात्रा में पटाखे खरीद लिए थे, सुप्रीम कोर्ट के ताजे फैसले के बाद उनके नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

एनसीआर में हवा की गुणवत्ता वैसे भी बहुत खराब है और इसके लिए सिर्फ पटाखे जिम्मेदार नहीं हैं. आंकड़े बताते हैं कि दीपावली के बाद हवा में सल्फर डाईऑक्साइड जैसे प्रदूषक की मात्रा अचानक बढ़ जाती है. लेकिन इसे रोकने के लिए पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के बजाय एक उपाय यह भी किया जा सकता है कि यहां उन्हीं पटाखों की बिक्री की इजाजत दी जाए जिनसे कम प्रदूषण फैलता है. (स्रोत)