भारतीय जनता पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर दी है. इसके तहत पार्टी ने उन मुद्दों को भी चिन्हित करना शुरू कर दिया है जो उसके लिए परेशानी बन सकते हैं. डीएनए की ख़बर के मुताबिक में ऐसे मसलों में सबसे अहम देश के विभिन्न राज्यों में हुए किसान आंदोलन हैं जो भाजपा की बेचैनी बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं.

भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने 12 अक्टूबर को दिल्ली में विचारमंथन का आयोजन किया है. इसमें सबसे अहम और केंद्रीय मसला किसान आंदोलन ही है. सूत्र बताते हैं कि यह आपात बैठक है. इसमें केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ख़ास तौर पर उपस्थित रहेंगे. साथ ही उन सभी राज्यों के कृषि मंत्री भी बुलाए गए हैं, जहां भाजपा ख़ुद या सहयोगियों के साथ सत्ता में है. यानी बैठक में बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर के कृषि मंत्रियों के हिस्सा लेने की भी संभावना है.

सूत्रों के मुताबिक आगे चलकर इसी मसले पर एक और विस्तृत बैठक हो सकती है. इसमें असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, गोवा जैसे अन्य भाजपाशासित राज्यों के प्रतिनिधियों को भी बुलाया जाएगा. इन बैठकों में भाजपा और आरएसएस से जुड़े आर्थिक चिंतक, स्वदेशी आंदोलन के समर्थक विचारक, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मुरलीधर राव और भाजपा किसान मोर्चा के प्रमुख बीरेंद्र सिंह भी मौज़ूद रहेंगे. इसके अलावा कई अन्य किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को भी बुलाया गया है. ताकि किसानों की मांगों और समस्याओं का सर्वसम्मत समाधान खोजा जा सके.

ग़ौरतलब है कि पिछले दिनाें महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान जैसे कई राज्यों में उग्र किसान आंदोलन हुए हैं. उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में भी किसानों में असंतोष सुगबुगाता दिखा है. तमिलनाडु के किसान तो लंबे समय से दिल्ली में न जाने केैसे-कैसे तरीके अपनाकर सरकारों का ध्यान अपनी मांगों की तरफ खींचने की कोशिश कर रहे हैं. किसानों के इस असंतोष को देखते हुए महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों ने किसानों के कर्ज माफ करने की घोषणा की है. मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड और हरियाणा की सरकारों ने भी कई राहतों का एलान किया है. लेकिन इससे किसानों का असंतोष पूरी तरह शांत हुआ हो ऐसा लगता नहीं है.