देश की अर्थव्यवस्था को लेकर अभी तो हर तरफ नकारात्मक संकेत ही मिल रहे हैं. अभी मंगलवार को ही अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी 2017 में भारतीय अर्थव्यव्था की वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.7 फीसदी कर दिया है. इसके लिए उसने नोटबंदी जैसे दुस्साहसिक कदम और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को ज़िम्मेदार बताया है. इसी बीच ख़बर आई है कि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) की बुधवार को पहली बैठक हो रही है. ऐसे में यह सवाल लाज़मी ही है कि क्या ईएसी-पीएम अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कोई बड़ा फैसला करेगी.

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक बीती 25 सितंबर को ही गठित की गई ईएसी-पीएम की पहली बैठक की अध्यक्षता नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबरॉय करेंगे. इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियन अर्थव्यवस्था के मौज़ूदा हालात पर एक प्रेजेंटेशन देंगे. इसमें आर्थिक तरक्की की रफ्तार बढ़ाने और रोजगार के नए अवसरों के सृजन जैसे मुद्दों पर तात्कालिक हस्तक्षेप की ज़रूरत पर बल दिया जाएगा.

सूत्रों की मानें तो इस बैठक में ईएसी प्रधानमंत्री को कोई बड़ा मशविरा शायद ही दे. अलबत्ता वह कौशल विकास, व्यापार-वाणिज्य, डिजिटल इकॉनॉमी, मूलभूत ढांचा, कृषि, नवाचारयुक्त पारिस्थितिक तंत्र आदि क्षेत्रों को चिन्हित कर सकती है, जहां तुरंत नीतिगत हस्तक्षेप और मशविरे की ज़रूरत है. इसके अलावा अर्थव्यवस्था की समयबद्ध निगरानी के लिए एक तंत्र विकसित करने के बारे में भी विचार-विमर्श किया जा सकता है.

इस ख़बर के बीच यहां एक और बात ग़ौर करने लायक यह है कि आईएमएफ ने जहां भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को घटाया है वहीं चीन के आर्थिक विकास का अनुमान बढ़ाया भी है. आईएमएफ ने अनुमान जताया है कि चीन की आर्थिक वृद्धि दर 2017 में 6.8 फीसदी रह सकती है जबकि पहले संगठन ने यह आंकड़ा 6.7 प्रतिशत बताया था.

हालांकि भारत और चीन के इन अनुमानों के बीच दोनों देशों से संबंधित एक विरोधाभासी तथ्य भी इसी संगठन ने सामने रखा है. इसके मुताबिक चीन ने बढ़ते वैश्विक कर्ज़ की समस्या को नहीं संभाला तो उसकी अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम रहेगा. वहीं भारत के संदर्भ में आईएमएफ का मानना है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने आर्थिक मोर्चें पर जो ढांचागत सुधार किए हैं उससे देश की अर्थव्यवस्था जल्दी ही पटरी पर लौटेगी और वह आठ फीसदी की वृद्धि दर भी हासिल कर सकती है.