कश्मीर घाटी में पहली बार आतंकनिरोधी अभियान में भारतीय वायु सेना के दो गरुड़ कमांडो शहीद हुए हैं. बांदीपोरा जिले में आतंकियों के साथ मुठभेड़ के दौरान बुधवार को ये जवान शहीद हुए. इस मुठभेड़ में दो आतंकी भी मारे गए हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक सेना के प्रवक्ता राजेश कालिया ने बताया है, ‘वायु सेना के कमांडो आतंकनिरोधी अभियान के संचालन प्रशिक्षण के लिए सुरक्षा बलों के साथ शामिल किए गए थे. इसी दौरान वे आतंकियों का निशाना बन गए.’ ख़बर के मुताबिक बांदीपोरा के हाजिन इलाके में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी. इसके बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया. आतंकियों से मुठभेड़ बुधवार सुबह शुरू हुई थी.

आतंकियाें के साथ तीखी गोलीबारी के दौरान ही सर्जेंट के मिलिंद किशोर और कॉरपोरल नीलेश कुमार नयन शहीद हो गए. महाराष्ट्र के रहने वाले सर्जेंट किशोर 33 साल के थे. वे 2002 में वायु सेना में शामिल हुए थे. जबकि बिहार के निवासी 31 वर्षीय कॉरपोरल नीलेश 2005 में वायु सेना में आए थे. ख़बर के मुताबिक श्रीनगर में 1990 में भारतीय वायु सेना के चार अफसर शहीद हुए थे. लेकिन वे आतंकी हमले का शिकार बने थे.

गरुड़ कमांडो के ऊपर वायु सेना के तमाम प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का जिम्मा होता है. राहत और बचाव कार्यों तथा हमलावरों से मुकाबले का भी इन्हें प्रशिक्षण हासिल होता है. साल 2001 में वायु सेना के दो ठिकानों पर आतंकी हमले की कोशिश के बाद प्रशिक्षित गरुड़ कमांडो इकाई स्थापित करने की ज़रूरत महसूस हुई. इसके बाद बीते साल ही जनवरी में जब आतंकियों ने पठानकोट एयरबेस पर हमला किया था तब उनसे मुकाबले की कमान गरुड़ कमांडो के ही हाथ में थी.