मोदी सरकार ने नौकरशाहों को मंत्रालयों में सचिव बनाने की परंपरा तोड़ एक आयुर्वेद विशेषज्ञ को आयुष मंत्रालय का सचिव बनाया है. एनडीटीवी के अनुसार बुधवार को वैद्य राजेश कोटेचा को सचिव बनाया गया है. राजेश कोटेचा गुजरात में जामनगर स्थित गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति थे. उन्हें इसी साल जून में आयुष मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया गया था. वैद्य राजेश कोटेचा का कार्यकाल तीन साल का होगा, जिसमें अतिरिक्त सचिव का कार्यकाल शामिल है. इस नियुक्ति को देश में आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक आयुष मंत्रालय में वैद्य राजेश कोटेचा के लिए जगह बनाने के लिए मौजूदा स्वास्थ्य और आयुष सचिव सीके मिश्रा का तबादला किया गया है. उन्हें पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्रालय का सचिव बनाया गया है. सीके मिश्रा को पिछले साल जुलाई में स्वास्थ्य सचिव बनाया गया था. स्वास्थ्य मंत्रालय में उनकी जगह पर अब आंध्र प्रदेश कॉडर की आईएएस अधिकारी प्रीति सूडान को लाया गया है.

हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा लैटरल एंट्री के तहत किसी को सचिव बनाने का यह कोई पहला मामला नहीं है. सरकार ने पिछले साल विश्व बैंक के विशेषज्ञ परमेश्वरन अय्यर को भी स्वच्छता और पेयजल विभाग में सचिव बनाया था. हालांकि, ग्रामीण इलाकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान का नेतृत्व करने वाले परमेश्वरन अय्यर वास्तव में बाहरी नहीं थे. उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा के साथ अपनी नौकरी की शुरुआत की थी, लेकिन बाद में विश्व बैंक में काम करने की इच्छा की वजह से नौकरी छोड़ दी थी.