स्पेन या यूरोप में ही नहीं, यूरोप से बाहर के भी बहुत सारे लोग, मंगलवार 10 अक्टूबर की शाम, बार्सिलोना पर टकटकी लगाये हुये थे. बार्सिलोना ही कतालोनिया या कैटेलोनिया नाम के उस स्पेनी प्रदेश की राजधानी है, जहां स्पेन से अलग हो कर एक स्वतंत्र देश बनने के लिए एक अक्टूबर को जनमतसंग्रह हुआ था. वहां की प्रादेशिक सरकार का दावा है कि जनमतसंग्रह को विफल करने के स्पेन की केंद्र सरकार के सारे प्रयासों को झुठलाते हुए मताधिकार प्राप्त 42.3 प्रतिशत लोगों ने फिर भी मतदान किया. उनमें से 90.9 प्रतिशत ने कतालोनिया की स्वाधीनता के पक्ष में और केवल 7.87 प्रतिशत ने विपक्ष में वोट डाले.

10 अक्टूबर को प्रादेशिक विधानसभा की बैठक थी. स्वतंत्रता के समर्थकों को आशा और विरोधियों को आशंका थी कि प्रादेशिक सरकार के प्रमुख कार्लेस पुजेमोंत, जिन्हें वहां ‘प्रेसिडेंट’ कहा जाता है, इस बैठक में कतालोनिया की स्वतंत्रता की घोषणा करेंगे. वास्तव में यह घोषणा तीन अक्टूबर को ही हो जानी चाहिये थी, पर पुजेमोंत उसे एक सप्ताह तक के लिए टालने में सफल रहे. समझा जाता है कि वे जिन तीन पार्टियों की मिलीजुली सरकार के प्रमुख हैं, उनमें से उग्रवामपंथी ‘सीयूपी’, बिना आगा-पीछा सोचे, स्पेन से तुरंत अलग हो जाना चाहती है जबकि वे स्वयं ऐसा करने से हिचकिचा रहे हैं. इसी रस्साक़शी के कारण विधानसभा की बैठक एक घंटे के विलंब के बाद शुरू हो पायी.

40 साल लंबी कवायद

बैठक में पुजेमोंत ने पहले तो यह बताया कि कतालोनिया कब से और किन-किन वैधानिक शांतिपूर्ण तरीकों से, स्पेन के संघीय ढांचे के भीतर ही, अपने लिए अधिक स्वायत्तता की मांग करता रहा है, और उसे अब तक किस तरह टरकाया या बेवकूफ़ बनाया जाता रहा है. उनका कहना था कि वैधानिक रास्तों वाले पिछले लगभग 40 वर्षों के प्रयासों की विफलता से विवश हो कर ही जनमतसंग्रह का रास्ता अपनाना पड़ा.

पुजेमोंत ने कहा कि जनमतसंग्रह से मिला स्वाधीनता का जनादेश हमारे लिए बाध्यकारी है. तब भी ‘आप मुझसे किसी धौंस-धमकी की उम्मीद नहीं करें.’ अनुभव यही बताता है कि लोकतंत्र में समाधान ‘शांति और संवाद’ के माध्यम से ही निकलते हैं. इसलिए ‘हम बातचीत के हित में कुछ समय निकालने के विचार से स्वतंत्रता की (औपचारिक) घोषणा को कुछ सप्ताहों के लिए स्थगित रखने का प्रस्ताव रख रहे हैं.’

‘हम अपराधी, सिरफिरे या तख्तापलटू लोग नहीं हैं’

कतालोनिया के इस प्रादेशिक सरकार-प्रमुख का कहना था कि कतालोनिया एक स्पेनी ही नहीं, यूरोपीय मामला भी है. उन्होंने कहा, ‘यह ज़रूरी है किहम स्थिति को कथनी या करनी द्वारा और अधिक उत्तेजक बनाने के बदले अनुत्तेजक बनाने पर ध्यान दें.’ स्पेनी जनता और सरकार का नाम लिये बिना पुजेमोंत ने आगे कहा, ‘हम कोई अपराधी, सिरफिरे या तख्तापलटू लोग नहीं है्ं... हम भी सामान्य लोग हैं, जो इतना ही निवेदन कर रहे हैं कि हमें (अपना रास्ता) खुद चुनने दिया जाये... मैं स्वाधीनता के रास्ते पर चलना चाहता हूं. संवाद के द्वारा वहां पहुंचना चाहता हूं. तभी यह सारा विवाद शांतिपूर्ण और सम्मानजनक ढंग से जनहित में हल हो सकता है.’

कतालोनिया की प्रादेशिक सरकार के प्रमुख कार्लेस पुजेमोंत
कतालोनिया की प्रादेशिक सरकार के प्रमुख कार्लेस पुजेमोंत

स्पेनी सरकार को सीधे संबोधित करते हुए पुजेमोंत ने कहा, ‘स्पेनी सरकार से मैं कहना चाहता हूंः हमें ही नहीं, उनको भी ज़रा सुनिये, जो बीच-बचाव करना चाहते हैं.’ संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अनान और अमेरिका के पिछले राष्ट्रपति बराक ओबामा का नाम लेते हुए पुजेमोंत ने कहा कि संसार के आठ जाने-माने लोग उनके और स्पेनी सरकार के बीच मध्यस्थता करने के लिए तैयार हैं.

यूरोपीय संघ के अध्यक्ष तुस्क की अपील

कतालोनिया की विधानसभा में वहां के सरकार प्रमुख के इस भाषण से कुछ घंटे पहले यूरोपीय सरकार प्रमुखों की परिषद के अध्यक्ष दोनाल्द तुस्क ने पुजेमोंत से अपील की थी कि वे कतालोनिया की स्वधीनता संबंधी एकतरफ़ा घोषणा को टाल दें और स्पेनी प्रधानमंत्री के साथ बातचीत का कोई रास्ता निकालें. तुस्क ने अपनी अपील में कहा, ‘मैं एक जातीय अल्पसंख्यक और एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर आप को संबोधित कर रहा हूं, जो ख़ुद भी पुलिस के डंडे की पिटाई का भुक्तभोगी रह चुका है. मैं आज आप से अनुरोध कर रहा हूं कि नेकनीयती के साथ आप (स्पेन की) संवैधानिक व्यवस्था का आदर करते हुए ऐसा कोई निर्णय घोषित न करें, जो किसी संवाद को असंभव बना दे. विविधता किसी ऐसे विवाद का कारण नहीं हो सकती और न होनी चाहिये, जिस के परिणाम निश्चित रूप से कतालोनिया के लिए, स्पेन के लिए और पूरे यूरोप के लिए भी अनिष्टकारी हों.’

स्पेनी राजनीति के जानकारों का कहना है कि पुजेमोंत स्वयं एक मध्यमार्गी हैं, पर वे अपने सहयोगी दल उग्रवामपंथी ‘सीयूपी’ की ओर से स्वतंत्रता की घोषणा करने के भारी दबाव में हैं. वे पूरी कोशिश कर रहे हैं कि स्पेनी प्रधानमंत्री राख़ोय बातचीत करने और बीच का कोई रास्ता निकालने के लिए राज़ी हो जायें, पर राख़ोय के अड़ियलपन के कारण बात आगे बढ़ ही नहीं पा रही है.

स्पेन का अल्टिमेटम

स्पेन के प्रधानमंत्री मारियानो राख़ोय, अब तक के अपने सभी वक्तव्यों में, कतालोनिया के साथ विवाद को स्पेन का घरेलू मामला बताते हुए किसी भी प्रकार की मध्यस्थता या बातचीत को साफ़-साफ़ ठुकराते ही रहे हैं. अगले ही दिन, यानी बुधवार 11 अक्टूबर को, उन्होंने अपने मंत्रिमंडल की एक बैठक बुलाई और उसके बाद शाम को स्पेनी संसद में एक वक्तव्य भी दिया. राख़ोय ने कतालोनिया के सरकार-प्रमुख पुजेमोंत से पूछा कि उन्होंने एक दिन पहले अपनी विधानसभा में बोलते हुए कतालोनिया की स्वतंत्रता घोषित कर दी है या नहीं, इसे स्पष्ट करें? स्पेनी मीडिया के अनुसार, राख़ोय ने इस स्पष्टीकरण के लिए 16 अक्टूबर तक का समय दिया है.

राख़ोय ने अपने वक्तव्य में कहा, ‘श्रीमान पुजेमोंत इस प्रश्न का जो उत्तर देंगे, वही अगले दिनों के भविष्य का फैसला करेगा... यह तय करना कतालोनिया की प्रादेशिक सरकार के हाथों में है कि वह विधिसम्मतता की तरफ लौटना और वहां के प्रादेशिक (प्रशासनिक) संस्थानों में सामान्य स्थिति बहाल करना चाहती है या नहीं.’ राख़ोय ने सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए उन्हें 19 अक्टूबर तक का समय दिया है.

संविधान की धारा 155 लागू करने की धमकी

उन्होंने साफ़ धमकी दी कि कतालोनिया की प्रादेशिक सरकार ने यदि वास्तव में स्वतंत्रता की घोषणा करदी है या अगले दिनों में करती है, तो वहां स्पेनी संविधान की धारा 155 लागू करदी जायेगी. ‘आप अपने स्वायत्त प्रदेश की सरकार चलाने के लिए चुने गए हैं,’ राख़ोय ने पुजेमोंत की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘न कि एकतरफ़ा ढंग से स्वतंत्रता की घोषणा करने या (प्रदेश की) स्वायत्तता को त्याग देने के लिए.’ स्पेन की सेशलिस्ट पार्टी और कई दूसरी विपक्षी पार्टियां भी प्रधानमंत्री राख़ोय के इस कठोर रुख में उनके साथ हैं.

स्पेनी संविधान की धारा 155 लागू करने का अर्थ है कि माद्रिद (मैड्रिड) स्थित स्पेन की क्रेंद्र सरकार कतालोनिया की विधानसभा को भंग कर देगी और वहां की सरकार को हटाकर शासन अपने हाथों में ले लेगी. कतालोनिया की प्रादेशिक पुलिस भी तब केंद्र सरकार के अधीन हो जायेगी. यह भी हो सकता है कि कतालोनिया के सरकार-प्रमुख और प्रमुख मंत्रियों को गिरफ्तार कर उन पर देश को तोड़ने का षड़यंत्र रचने का आरोप लगा कर मुकदमा चलाया जाये.

कतालोनिया के सरकार-प्रमुख कार्लेस पुजेमोंत ने, एक अक्टूबर वाले जनमतसंग्रह में मिले भारी समर्थन के बावजूद, विधानसभा की बैठक बुलाने में एक सप्ताह की देर और इस बैठक में स्वतंत्रता की विथिवत घोषणा करने के बदले स्पेनी सरकार से बातचीत का प्रस्ताव संभवतः कई दूसरे कारणों से भी रखा.

बैंकों और कंपनियों का पलायन

इस एक ही सप्ताह में कतालोनिया में कार्यरत दो सबसे बड़े बैंकों ने घोषणा की कि यदि कतालोनिया स्पेन से अलग होता है, तो वे अपने मुख्यालय बार्सिलोना से हटा कर स्पेन के किसी दूसरे शहर में स्थानांतरित कर देंगे. उनकी देखादेखी वहां के दूसरे बैंक भी यही कर सकते हैं. वहां कार्यरत जर्मनी की फ़ोल्क्सवागन जैसी बड़ी-बड़ी विदेशी कंपनियों ने भी अपने कारख़ाने और कार्यालय वहां से हटाने के संकेत देने शुरू कर दिये. यानी, अपनी जिस आर्थिक-औद्योगिक शक्ति के बल पर कतालोनिया स्पेन से अलग हो कर भी अब तक की तरह ही शक्तिशाली बने रहने का सपना देख रहा था, स्पेन से अलग होने पर वह एक दुःस्वप्न सिद्ध हो सकता है.

उधर, यूरोपीय संघ की ओर से संकेत मिलने लगे कि स्पेन से अलग होते ही कतालोनिया उन सारी आर्थिक-राजनैतिक सुविधाओं से वंचित हो जायेगा, जो उसे स्पेन का एक प्रदेश होन के नाते इस समय मिली हुई हैं. वह पहले ही दिन से न तो यूरोप की साझी मुद्रा यूरो का अपने यहां उपयोग कर सकेगा और न उसके नागरिक बिना वीसा के जब चाहें तब यूरोपीय संघ के किसी देश में आ-जा सकेंगे.

स्वायत्तता छिनने की आशंका

स्पेन की ओर से इशारे होने लगे थे कि स्वतंत्रता की घोषणा होते ही संविधान की धारा 155 के अंतर्गत कतालोनिया की वर्तमान स्वायत्तता उससे छीन ली जायेगी. सरकार-प्रमुख सहित सभी बड़े अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया जायेगा. समाचार पोर्टल ‘ब्लूमबर्ग’ के अनुसार, कतालोनिया के सरकार-प्रमुख कार्लेस पुजेमोंत ने यदि मंगलवार को स्वतंत्रता की घोषणा कर दी होती, तो स्पेनी पुलिस ने उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया होता. ‘ब्लूमबर्ग’ का कहना है कि इस प्रक्रिया से जुड़े स्पेनी सरकार के दो अधिकारियों ने इस तैयारी की पुष्टि की है.

स्पेन का एक विशेष पुलिस दस्ता इस काम के लिए पहले से ही बार्सिलोना पहुंच चुका था. बार्सिलोना के हवाई अड्डे और रेलवे स्टेशनों पर स्पेन के संघीय पुलिस बलों की संख्या भी बढ़ा दी गयी थी. स्वयं पुजेमोंत ने भी एक लप्ताह पहले जर्मन दैनिक ‘बिल्ड’ से कहा था, ‘मेरी गिरफ्तारी संभव है, हालांकि वह एक बर्बर क़दम होगा.’

आशा बनी निराशा

‘बिल्ड’ के अनुसार, 1 अक्टूबर वाले जनमतसंग्रह के बाद पुजेमोंत आशा कर रहे थे कि स्पेन के प्रधानमंत्री मारियानो राख़ोय उन से बातचीत करेंगे और यूरोपीय संघ भी उनके हाथ मज़बूत करेगा. इसके बदले उन्होंने यह पाया कि कोई यूरोपीय देश उनके स्वतंत्र कतालोनिया को मान्यता नहीं देना चाहता और बड़े-बड़े बैंक एवं उद्योग कतालोनिया से पलायन करने की फ़िराक में हैं.

कतालोनिया के घटनाक्रम के परिप्रेक्ष्य में इस बीच यूरोप के अंतरराष्ट्रीय क़ानूनविद स्वतंत्रता की ओर ले जाने वाले आत्मनिर्णय के अब तक के अधिकार की एक ऐसी व्याख्या करने लगे हैं, जो कश्मीर के संदर्भ में भारत के लिए भी बहुत दिलचस्प हो सकती है.

कतालोनिया और कश्मीर

वे कहते हैं कि किसी देश में रहने वाले जिस जनसमुदाय के पास अपनी क्षेत्रीय स्वायत्तता हो, अपनी विधायिका (संसद / विधानसभा) और भाषा हो और उसे देश की संसद में भी प्रतिनिधित्व मिला हुआ हो, उसे देश से अलग हो कर स्वतंत्र होने का स्वाभाविक अधिकार नहीं दिया जा सकता. एक अलग राष्ट्र कहलाने और किसी देश से अलग हो कर स्वतंत्र होने का अधिकार केवल उपनिवेशों या ऐसे जनसमुदायों का ही स्वाभाविक अधिकार माना जा सकता है, जिन्हें भारी अत्याचारों या मानवाधिकारों के हनन का का सामना करना पड़ रहा हो. इसके समर्थन में 1990 वाले दशक के कोसोवो का उदाहरण दिया जाता है.

इन व्याख्याकारों के अनुसार, कतालोनिया के पास अपनी क्षेत्रीय स्वायत्तता है. अपनी विधायिका (विधानसभा) और कतालानी भाषा है. उसे देश की संसद में भी प्रतिनिधित्व मिला हुआ है. इसलिए उसे एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देना उचित नहीं होगा, भले ही वह अपने इतिहास में कई बार एक स्वतंत्र देश रह चुका है. ये सारी बातें कश्मीर पर भी तो लागू होती हैं! कतालोनिया तो स्पेनी बजट में भारी योगदान करता है, जबकि कश्मीर का बजट भारत सरकार के अनुदान पर चलता है. कतालोनिया में शेष स्पेन के लोग भारी संख्या में बसाये गये हैं, जबकि शेष भारत के लोग कश्मीर में बस ही नहीं सकते. जो लोग कश्मीर की स्वतंत्रता की पैरवी करते हैं, कतालोनिया के घटनाक्रम को देखते हुए उन्हें थोड़ा आत्ममंथन करना चाहिये.