राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह के मामले में बीच का रास्ता चुना है. एनडीटीवी के मुताबिक गुरुवार को आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि अगर आरोप लगाने वाले गड़बड़ी के सबूत दें तो जांच होनी चाहिए. भोपाल में आरएसएस की भारतीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद उन्होंने कहा, ‘अगर किसी के खिलाफ भ्रष्टाचार के प्रथम दृष्टया साक्ष्य है तो उसकी जांच जरूर होनी चाहिए.’ यह पूछे जाने पर कि क्या वे मानते हैं कि जय शाह के खिलाफ मामला बनता है, दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि यह तो उन लोगों को साबित करना है, जिन्होंने आरोप लगाए हैं.

पिछले हफ्ते द वायर ने एक रिपोर्ट में कहा था कि केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनी टेंपल इंटरप्राइजेज के सालाना टर्नओवर में जबरदस्त उछाल आया है. रिपोर्ट के मुताबिक टेंपल इंटरप्राइजेज का 2014-15 में कुल टर्नओवर 50 हजार रुपये था जो 2015-16 में 16 हजार गुना बढ़कर 80 करोड़ रुपये हो गया. ये बातें रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास कंपनी द्वारा जमा कराए गए दस्तावेजों के आधार पर कही गई थीं. इस रिपोर्ट में जय शाह की कंपनी को एक सरकारी संस्था से मिले कर्ज पर भी सवाल उठाया गया था.

उधर, जय शाह ने द वायर की खबर को बदनाम करने की कोशिश बताते हुए इसके संपादक और रिपोर्टर के खिलाफ 100 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा कर दिया है. इस बीच जय शाह का बचाव करते हुए भाजपा ने कहा है कि जय शाह की कंपनी को कर्ज पारदर्शी तरीके से दिया गया था, जिसे ब्याज सहित लौटाया जा चुका है.