बहुचर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में निचली अदालत से सजा पाए तलवार दंपत्ति को आज इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सभी आरोपों से मुक्त कर दिया. साल 2013 में सीबीआई की विशेष अदालत ने तलवार दंपत्ति को उनकी ही 14 वर्षीय बेटी आरुषि और नौकर हेमराज की हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. लेकिन 208 पन्नों के उस फैसले में कई ऐसी खामियां थी जिनके चलते तभी से तय माना जा रहा था कि ऊपरी अदालतों में यह फैसला पलटा जा सकता है.

इस मामले में जो बातें शुरुआत से ही डॉक्टर राजेश और नुपुर तलवार के पक्ष में जाती दिख रही थीं उन पर चर्चा से पहले बेहद संक्षेप में इस पूरे मामले को समझते हैं. 15 मई, 2008 की रात नोएडा के जलवायु विहार में 14 वर्षीय आरुषि तलवार की हत्या हुई थी. वह डॉक्टर दंपति राजेश तलवार और नूपुर तलवार की इकलौती बेटी थी. जिस दिन आरुषि की हत्या की खबर आई उस दिन उनका नौकर हेमराज गायब था. इसलिए हत्या का पहला शक उसी पर जताया गया. लेकिन अगले दिन उसका शव भी उसी घर की छत से बरामद हो गया था.

इस मामले की शुरूआती जांच स्थानीय पुलिस ने की और फिर कुछ ही समय बाद यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया. सीबीआई की भी दो अलग-अलग टीमों ने इस मामले की जांच की. जैसे-जैसे इस मामले में जांचकर्ता बदले, वैसे-वैसे शक की सुई भी अलग-अलग लोगों की तरफ घूमती रही.

सीबीआई की पहली टीम मान रही थी कि आरुषि और हेमराज की हत्या डॉक्टर दंपत्ति के कंपाउंडर कृष्णा और उसके दो अन्य साथियों - राजकुमार और विजय मंडल - ने की है. लेकिन सीबीआई की दूसरी और आखिरी टीम ने तलवार दंपत्ति को इन हत्याओं का दोषी माना. इस टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही सीबीआई कोर्ट ने तलवार दंपत्ति को उम्रकैद की सजा देने का फैसला सुनाया था जिसे अब उच्च न्यायालय ने पलट दिया है. जो बातें शुरुआत से ही तलवार दंपत्ति के पक्ष में जाती दिख रही थी, वे इस प्रकार हैं:

1. नार्को टेस्ट में डॉक्टर दंपत्ति और उनके पड़ोसियों के नौकरों ने अपराध करना स्वीकार किया था.

2. सीबीआई के कई लोगों ने यह बयान दिया था कि नौकरों ने अपने बयानों में भी अपराध स्वीकार किया है.

3. तलवार दंपति के नार्को में कुछ भी ऐसा नहीं पाया गया था जिससे उसकी अपराध में संलिप्तता स्थापित होती हो.

4. नौकर कृष्णा के तकिये से हेमराज का खून मिला था (हालांकि सीबीआई द्वारा कहा गया कि यह सिर्फ टाइपिंग की गलती के कारण हुआ है).

5. नार्को में नौकरों ने यह भी बताया कि घटना वाली रात वे सभी हेमराज के कमरे में शराब पी रहे थे और टीवी पर एक नेपाली गाना चल रहा था. इस बात की पुष्टि सीबीआई ने उस नेपाली चैनल से भी की थी जिससे यह स्थापित हुआ था कि उस रात वही गाना चैनल पर चलाया गया था.

6. सीबीआई टीम द्वारा तलवार के घर पर एक साउंड टेस्ट किया गया था. इसमें पाया गया कि यदि दोनों कमरों में एसी चल रहे हों तो एक कमरे की आवाज दूसरे में नहीं सुनाई पड़ती. ऐसे में संभव है कि हत्या वाली रात उसी घर में होने के बावजूद भी तलवार दंपत्ति को हत्या का पता न चला हो.

7. आरुषि और हेमराज के पोस्टमार्टम में कुछ भी असामान्य नहीं पाया गया था. लेकिन पोस्टमार्टम करने वाले दोनों डॉक्टरों ने लगभग एक साल बाद उसमें नए तथ्य जोड़ते हुए अपने बयान दिए. सीबीआई के जज एस लाल ने यह तो माना था कि आरुषि का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर दोहरे ने यह भारी चूक की है लेकिन फिर भी उनके बयान को स्वीकार कर लिया गया.

8. इस बात का कोई भी सबूत नहीं है कि हेमराज की हत्या आरुषि के कमरे में हुई थी. जबकि सीबीआई का तर्क था कि दोनों हत्याएं उसी कमरे में हुईं.

9. राजेश और नूपुर तलवार के कपड़ों पर सिर्फ आरुषि का खून मिला था. बचाव पक्ष का कहना था कि यह खून उस वक्त लगा जब सुबह उन्होंने अपनी बेटी की लाश देखी और उससे लिपटकर रोने लगे. हेमराज का खून उनके कपड़ों पर नहीं था. हत्या वाली रात आरुषि ने जो तस्वीरें ली थीं उनसे साफ था कि डॉक्टर दंपत्ति ने अगली सुबह भी रात वाले कपड़े ही पहने हुए थे. जिस बर्बरता से हेमराज को मारा गया था, यदि यह अपराध उन्होंने ही किया होता तो उनके कपड़ों पर हेमराज का खून भी लगा होना चाहिए था.

10. कई डॉक्टरों के पैनल ने यह बताया था कि हत्या खुखरी से किया जाना संभव है. पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर भी इस पैनल का हिस्सा थे. बाद में पोस्टमार्टम करने वाले दोनों डॉक्टरों ने अपने बयान और राय बदल दिए थे.