अर्थव्यवस्था के बुरे प्रदर्शन के चलते आलोचकों के हमले झेल रही मोदी सरकार को गुरुवार को आए महंगाई और औद्योगिक विकास के आंकड़ों ने बड़ी राहत दी है. ताजा आंकड़ों के अनुसार उद्योगों की विकास दर मापने वाला औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) अगस्त में 4.3 फीसदी तक पहुंच गया. यह पिछले नौ महीनों का सर्वोच्च स्तर है. जीएसटी लागू होने के बाद जुलाई में उद्योगों की विकास दर केवल 0.9 फीसदी थी. दूसरी ओर सितंबर में देश की खुदरा महंगाई दर बढ़ने के बजाय स्थिर रही है. अगस्त के 3.28 फीसदी (संशोधन से पहले 3.36 फीसदी) की तुलना में सितंबर में भी यह आंकड़ा 3.28 फीसदी का ही रहा.

उद्योगों की विकास दर में अगस्त में आई तेजी विनिर्माण और खनन क्षेत्रों में हुए सुधार के चलते हुई है. ऐसा इसलिए कि आईआईपी में विनिर्माण क्षेत्र का हिस्सा करीब तीन चौथाई का है. आंकड़ों के अनुसार अगस्त में विनिर्माण क्षेत्र में जुलाई के 0.1 फीसदी की तुलना में 3.1 फीसदी का विकास हुआ. वहीं खनन क्षेत्र में जुलाई के 4.8 फीसदी की तुलना में 9.4 फीसदी की बंपर वृद्धि हुई. बिजली के क्षेत्र में भी विकास दर 8.3 फीसदी रही, जो एक महीने पहले 6.5 फीसदी थी.

जानकारों के अनुसार अगस्त के आईआईपी के आंकड़ों से ऐसा लग रहा है कि जून और जुलाई में इसके लगभग रुक जाने का कारण वस्तु और सेवा कर का शुरू होना हो सकता है. उनके अनुसार कारोबारियों को नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के चलते अपने उत्पादों की बिक्री प्रभावित होने की आशंका थी, इसलिए इसकी खपत और उत्पादन पर असर पड़ा होगा.

दूसरी ओर खुदरा महंगाई दर में जानकारों के अनुमानों के विपरीत कोई बढ़ोतरी नहीं हुई. रॉयटर्स ने दो दिन पहले अपने एक सर्वेक्षण में बताया था कि सितंबर महीने में खुदरा महंगाई 3.6 फीसदी तक जा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. भारतीय रिजर्व बैंक ने भी अनुमान जताया था कि अप्रैल से सितंबर के बीच यह आंकड़ा 2 से 3.5 फीसदी के बीच रह सकता है. लेकिन पिछले छह महीनों के आंकड़ों का औसत निकालने पर यह केवल 2.6 फीसदी ही रहा. केंद्र सरकार के लिए यह बड़ी राहत वाली बात है. इससे पहले अप्रैल से अगस्त के बीच के पांच महीनों में खुदरा महंगाई दर क्रमश: 2.99, 2.18, 1.54, 2.36 और 3.28 फीसदी रही थी.