टाटा समूह ने अपने दूरसंचार कारोबार को भारती एयरटेल के हाथों बेचने का ऐलान कर दिया है. टाटा टेलीसर्विसेज ने गुरुवार को बताया कि ‘टाटा डोकोमो’ के कारोबार को अब एयरटेल के साथ मिला दिया जाएगा. अगले कुछ महीनों में इसकी अधिग्रहण प्रकिया पूरी होने के बाद टाटा डोकोमो के करीब चार करोड़ ग्राहक एयरटेल के हो जाएंगे. पिछले साल रिलायंस जियो के लॉन्च होने के बाद दूसरी दूरसंचार कंपनियोंं की हालत लगातार बिगड़ रही है जिसके चलते उन्हें आपस में विलय को मजबूर होना पड़ रहा है.

इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार दोनोंं कंपनियों के बीच हुए समझौते के तहत एयरटेल ने टाटा समूह के देश के 19 सर्किलों में फैले कारोबार के अधिग्रहण का फैसला लिया है. अभी देश में कुल 22 दूरसंचार सर्किल हैं. अब इस सौदे को भारती एयरटेल, टाटा संस, टाटा टेलीसर्विसेज के प्रबंधन बोर्ड मंजूरी दे चुके हैं. इसके बाद इस सौदे को सरकार की मंजूरी के लिए भेज दिया गया है. वैसे यह सौदा कर्ज-मुक्त और नगदी-मुक्त की शर्तों पर हुआ है. यानी एयरटेल इस सौदे के लिए टाटा डोकोमो के स्पेक्ट्रम के कुछ बकाया राशि छोड़कर और कोई कर्ज स्वीकार नहीं करेगी और न ही उसे कोई नगद राशि देगी.

करार के अनुसार टाटा टेलीसर्विसेज द्वारा लिए गए स्पेक्ट्रम के बाकी पैसे (करीब 10 हजार करोड़ रुपये) का करीब 20 फीसदी एयरटेल चुकाएगी. वहीं समूह की संचालक टाटा संस अपनी इस कंपनी के स्पेक्ट्रम के मद का शेष बकाया सहित अन्य कर्जे चुकाएगी. इस बारे में एक विशेषज्ञ ने बताया कि टाटा चाहती तो इस कंपनी को बंद कर सकती थी लेकिन उसने अपने कर्मचारियों को बेरोजगार होने से बचाने और अपनी ब्रांड इमेज बनाए रखने के लिए ऐसा सौदा किया.

वहीं इस सौदे के बाद टाटा टेलीसर्विसेज की स्पेक्ट्रम सहित सभी संपत्तियां और ग्राहक एयरटेल के हो जाएंगे. इस विलय से 1800, 2100 और 850 मेगाहर्ट्ज बैंड में एयरटेल का स्पेक्ट्रम पूल बढ़कर 178.5 मेगाहर्ट्ज हो जाएगा. रिपोर्ट के अनुसार टाटा ने एयरटेल के सामने अपने मौजूदा ग्राहकों को बेहतर सेवा देने की शर्त रखी है. एयरटेल ने इसके अलावा टाटा डोकोमो के ग्राहकों को अतिरिक्त आॅफर देने की बात भी मानी है.

यह सौदा यदि पूरा हो जाता है तो अब भारत के दूरसंचार बाजार में मुश्किल से पांच या छह कंपनियां ही रह जाएंगी. इससे पहले एयरटेल एक अन्य कंपनी टेलीनॉर को खरीदने का ऐलान कर चुकी है. वहीं आइडिया और वोडाफोन इंडिया ने अपने कारोबार के विलय की घोषणा कर दी है. दूसरी ओर अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशन यानी आरकॉम और एयरसेल भी विलय की बातचीत कर रही थी, जो अब टूट गई है.