इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री की कुर्सी के टॉवेल भगवा होने से हुई थी. फिर आदित्यनाथ की कार का इंटीरियर भगवा हुआ. अब ऐसा लग रहा है कि उत्तर प्रदेश की आदित्यनाथ सरकार पूरे राज्य को भगवा रंग से रंगने के अभियान पर तेजी से काम कर रही है.

स्कूल के बस्ते, बिजली के खंबे और ऐसी ही दूसरी चीजों के बाद अब यहां कुछ विशेष सरकारी बसों को भगवा और सफेद रंग से रंगा गया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रेरक व्यक्तित्वों में शामिल दीनदयाल उपाध्याय के जन्मशताब्दी वर्ष के प्रतीक के तौर पर इन बसों को भगवा किया गया है. बुधवार को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने इन बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है. उत्तर प्रदेश कैबिनेट के एक मंत्री सरकारी सेवाओं-सुविधाओं में भगवा रंग के बढ़ते इस्तेमाल की व्याख्या कुछ इस प्रकार करते हैं, ‘वैसे तो हमें सभी रंग पसंद हैं लेकिन भगवा हमारा पसंदीदा रंग है क्योंकि यह त्याग, बलिदान और शौर्य का प्रतीक है.’

हालांकि उत्तर प्रदेश में यह पहली बार नहीं हो रहा. यहां हर नई सरकार सार्वजनिक स्थानों-सेवा-सुविधाओं को अपने पसंदीदा रंग से रंगती रही है. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को नीला-सफेद तो वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) को हरा-लाल रंग पसंद था और इसकी वजह यह थी कि यह इन पार्टियों के झंडे का रंग था.

प्रचार का यह कोई नया ढंग नहीं है और उत्तर प्रदेश तक सीमित भी नहीं है. दूसरे प्रदेशों में भी सरकारें सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल पार्टी के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए करती रही हैं. गुजरात सरकार ने हाल ही में बस स्टॉपों को भगवा करवाया है. महाराष्ट्र सरकार ने भी पिछले साल सरकारी बेड़े में जिन बसों को शामिल किया था उनका रंग भगवा और सफेद था. वहीं ममता बनर्जी की सरकार कोलकाता के बड़े हिस्से को नीले और सफेद रंग में देखना चाह रही है.

सालों पहले तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री ने राज्य की बस सेवा का नाम ही अपने नाम पर कर दिया था. पुरात्ची थलाइवी डॉ जे जयललिता ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन लिमिटेड बस सेवा की ये बसें राज्य के कोने-कोने में दिखने लगी थीं. हालांकि अगले विधानसभा चुनाव में प्रचार का यह तरीका असफल साबित हुआ और इस विचार को आगे बढ़ानी वाली इस ‘क्रांतिकारी नेता’ की पार्टी चुनाव हार गई.

कुल मिलाकर प्रोपेगेंडा की ऐसी कोशिशें देखने में ही नहीं, विचारों में भी एकरंगी होती हैं और नागरिक इन पर ध्यान नहीं देते. उत्तर प्रदेश हो या तमिलनाडु, ऐसी सरकारें अक्सर ही लोगों की बढ़ती अपेक्षाओं से तालमेल बिठाने में असफल साबित होती हैं. चाहे नीली हो, लाल हो या फिर भगवा, उत्तर प्रदेश की बस सेवा को यह ख्याल रखना होगा कि वह यात्रियों के लिए सुविधाजनक हो. सड़कों पर परिवहन से संबंधित दिशा-निर्देश आसानी से समझ में आने वाले हों. जनता का पैसा सेवाओं और सुविधाओं को बेहतर से बेहतर बनाने के लिए खर्च होना चाहिए और इस दिशा में भी कि उसका फायदा ज्यादा से ज्यादा लोग उठा सकें. आज के दौर में किसी भी सार्वजनिक सेवा को तभी बेहतर कहा जा सकता है जब वह अपने ग्राहकों का ध्यान रखे न कि सिर्फ राजनीतिक विज्ञापन बनकर रह जाए. (स्रोत)