भारत में भुखमरी की स्थिति गंभीर रूप लेती जा रही है. इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि अंतरराष्ट्रीय खाद्या नीति अनुसंधान संस्थान (आईएफ़पीआरआई) के ग्लोबल हंगर इंडेक्स (जीएचआई) में भारत 100वें स्थान पर पहुंच गया है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के मुताबिक़ पिछले साल विकासशील देशों के इस सूचकांक में भारत की रैंकिंग 97वें स्थान पर थी, लेकिन एक साल में यह तीन पायदान और गिर गई है. ताज़ा रैंकिंग के मुताबिक़ भूखे देशों के मामले में भारत उत्तर कोरिया, बांग्लादेश यहां तक कि इराक़ से भी पीछे है. हालांकि उसकी स्थिति पाकिस्तान से बेहतर है.

आईएफ़पीआरआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत के बच्चों में भुखमरी की समस्या सबसे ज़्यादा कुपोषण की वजह से है और यहां सामाजिक क्षेत्र के प्रति मज़बूत प्रतिबद्धता दिखाने की ज़रूरत है. अपने एक बयान में संस्थान ने कहा, ‘(भुखमरी के मामले में) भारत एशिया में तीसरे स्थान पर है. केवल अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान उससे पीछे हैं.’ बयान में कहा गया कि इस साल के सूचकांक में भारत का स्कोर 31.4 है जोकि भुखमरी की ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है और इसने दक्षिण एशिया को (भूख से लड़ने की) सबसे ख़राब श्रेणी में ला दिया है जहां वह अफ्रीका के सहारा इलाके से थोड़ा ही पीछे है.

जीएचआई में भारत के पड़ोसी देशों में से अधिकतर की रैंकिंग उससे बेहतर है. इनमें चीन सबसे आगे है जो 29वें स्थान पर है. उसके बाद नेपाल 72वें, म्यांमार 77वें, श्रीलंका 84वें, बांग्लादेश 88वें, पाकिस्तान 106 और अफ़ग़ानिस्तान 107वें स्थान पर हैं. वहीं उत्तर कोरिया 93वें और इराक़ 78वें स्थान पर हैं. इस बार जीएचआई रैंकिंग के चार मानदंड हैं- अल्पपोषण, बच्चों की मृत्यु दर, वृद्धि में रुकावट. आईएफ़पीआरआई ने कहा कि भारत में पांच साल से कम उम्र के हर पांचवें बच्चे का वज़न उसकी लंबाई के हिसाब से बहुत कम है.