आम हिंदुस्तानियों ने नुसरत फतेह अली खान को 1990 के दशक के तुरंत बाद ही जानना शुरू किया जब उनके मशहूर पाकिस्तानी गीतों की हमारे बॉलीवुड ने नकल करनी शुरू की. मोहरा का ‘तू चीज बड़ी है मस्त मस्त’ और याराना का ‘मेरा पिया घर आया’ जैसे कई गीत हैं जो नुसरत साहब के गाए पाकिस्तानी गीतों की नकल थे. बाद के दिनों में खुद उन्होंने हिंदुस्तान आकर बॉलीवुड के लिए कुछ गीत गाए और इस तरह उनके गानों की नकल बंद हो गई. लेकिन यह भी सभी के मन में बैठ गया कि नुसरत साहब का पहली दफा हिंदुस्तान आना 1990 के बाद के सालों में ही मुमकिन हुआ जबकि पाकिस्तान में वे एक दशक पहले ही मशहूर हो चुके थे. लेकिन ऐसा है नहीं.

जब हिंदुस्तान में उन्हें कोई नहीं जानता था तब 1981 में संगीत निर्देशक खय्याम ने एक हिंदी फिल्म के लिए उनसे एक गीत गवाया था. फिल्म का नाम था ‘नाखुदा’ जिसके निर्माता यश चोपड़ा थे और गाने का नाम था ‘हक अली अली’. ये नुसरत साहब के पाकिस्तान में गाए गीत का ही एक वर्जन था जिसके लिए फिल्म में उन्हें ‘नुसरत अली और मुजाहिद अली’ के नाम से क्रेडिट दिया गया था. लेकिन इस गीत से पहले भी नुसरत साहब हिंदुस्तान आ चुके थे और यहां गा चुके थे!

नुसरत अली, मुजाहिद अली एंड पार्टी’ उस खानदानी कव्वाल ग्रुप का नाम था जिसके लिए नुसरत साहब गाया करते थे और उसके लीडर भी थे. खय्याम साहब के उन्हें हिंदुस्तान बुलाने के दो साल पहले यह कव्वाल पार्टी नुसरत साहब के साथ हिंदुस्तान आ चुकी थी और एक शादी में परफॉर्म कर चुकी थी. 1979 में शोमैन राज कपूर ने नुसरत साहब को अपने घर की एक शादी में गाने का निमंत्रण दिया था. शादी ऋषि कपूर और नीतू सिंह की थी. कहते हैं उस शादी में नुसरत साहब ने ‘सांसों की माला पे सिमरूं में पी का नाम’ गाया था. ये गीत वे खासतौर पर हिंदुस्तानी दर्शकों के लिए पाकिस्तान से तैयार करके लाए थे. तकरीबन बीस साल बाद फिर इसी गीत का बॉलीवुडीकरण कविता कृष्णमूर्ति की आवाज में शाहरुख खान की फिल्म ‘कोयला’ में हुआ था.