नरेंद्र मोदी सरकार शादी से पहले स्नातक करने वाली मेधावी मुस्लिम लड़कियों को 51 हजार रुपये का विशेष उपहार देने जा रही है. न्यूज 18 के मुताबिक इस बारे में मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन द्वारा रखे गए प्रस्ताव को केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है. ‘शादी शगुन’ योजना का मकसद अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों के बीच उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना है. अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों में मुस्लिम ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी शामिल हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन द्वारा संचालित बेगम हजरत महल राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पाने वाली सभी छात्राएं इस शादी शगुन योजना का पात्र होंगी. शादी शगुन की राशि इस छात्रवृत्ति से अलग होगी. लेकिन इसके लिए उनके माता-पिता की सालाना आय दो लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.

बेगम हजरत महल छात्रवृत्ति को 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने शुरू किया था. इसके तहत अल्पसंख्यक समुदायों की मेधावी लड़कियों को 12वीं तक मासिक वजीफा मिलता है. फाउंडेशन ने इसी छात्रवृत्ति को शादी से पहले स्नातक करने वाली लड़कियों तक बढ़ाने का प्रस्ताव जुलाई में अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के पास भेजा था. इसे जरूरी बताते हुए मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन के कोषाध्यक्ष शकीर हुसैन अंसारी ने कहा कि मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक परिवार अक्सर अपनी लड़कियों को स्नातक कराने या उनकी शादी के लिए पैसे जुटाने की दुविधा में रहते हैं. उनके मुताबिक ऐसे परिवार लड़कियों को आगे पढ़ाने के बजाए उनकी शादी के लिए पैसे जुटाने को तरजीह देते हैं.

मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन ने शादी शगुन योजना की शर्तों की जानकारी देने वाले वेबपोर्टल का ब्योरा तैयार करना शुरू कर दिया है. इसे अगले महीने केंद्रीय मंत्री के साथ आम निकाय की बैठक में रखा जाएगा.