अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सिक्योरिटी सिस्टम बनाया है जिससे हृदय के जरिये कंप्यूटर को लॉग इन किया जा सकेगा. यह सिस्टम यूजर के दिल के साइज़ यानी आकार को उसकी विशेष पहचान के रूप में इस्तेमाल करेगा. इन वैज्ञानिकों के मुताबिक उनका यह सिस्टम पासवर्ड और अन्य बायोमेट्रिक प्रणालियों से कहीं ज्यादा सुरक्षित है और इसका इस्तेमाल करने वाले किसी एक व्यक्ति के कंप्यूटर को दुनिया में कोई दूसरा व्यक्ति नहीं खोल पायेगा.

इस सिस्टम को बनाने में अमेरिका के बफैलो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक पिछले तीन साल से लगे हुए थे. इस खोज का हिस्सा रहे प्रोफेसर वेन्याओ जू ने मीडिया को बताया है कि उनसे अक्सर लोग कंप्यूटर के सिक्योरिटी सिस्टम को लेकर कुछ नया ईजाद करने को कहते थे. ऐसे में उन्हें ख्याल आया कि इंसान के हृदय का इस्तेमाल कर एक ऐसा सिस्टम बनाया जा सकता है जिसे कोई दूसरा व्यक्ति न खोल सके.

वे बताते हैं कि इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यह है कि दुनिया में हर इंसान के दिल का आकार अलग-अलग होता है और साथ ही किसी व्यक्ति के दिल के आकार में भी तब तक कोई बदलाव नहीं होता है जब तक उसे हृदय से संबंधित कोई बड़ी बीमारी न हो. प्रोफेसर वेन्याओ के मुताबिक ऐसे में कंप्यूटर सुरक्षा के मामले में उन्हें हृदय से बेहतर और कोई प्रभावी विकल्प नजर नहीं आया.

इस सिस्टम को बनाने वाले वैज्ञानिकों ने इसकी कार्य प्रणाली के बारे में भी बताया है. इनके अनुसार यह सिस्टम हृदय को एक विशेष राडार के जरिये स्कैन करेगा. जब यूजर पहली बार इस सिस्टम को इस्तेमाल करेगा तब स्कैनिंग में आठ सेकंड का समय लेगा, लेकिन इसके बाद जब भी यूजर मॉनिटर के सामने आएगा तो स्कैनिंग तुरत-फुरत हो जाएगी.

हालांकि, कुछ लोग इस तकनीक में इस्तेमाल होने वाले राडार की वजह से इससे स्वास्थ्य को नुक्सान पहुंचने की आशंका भी जाहिर कर रहे थे. लेकिन, वैज्ञानिकों ने इन स्वास्थ्य चिंताओं को पूरी तरह से नकार दिया है. इनके मुताबिक इस सिस्टम में जिस राडार का उपयोग किया गया है, उसकी सिग्नल स्ट्रेंथ वाईफाई की सिग्नल स्ट्रेंथ से भी कम है.

प्रोफेसर वेन्याओ जू के मुताबिक इस सिक्योरिटी सिस्टम को न केवल कंप्यूटर और स्मार्टफोन में बल्कि हवाई अड्डों पर भी पहचान के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा. वे बताते हैं कि हवाई अड्डों पर यह सिस्टम 30 मीटर की दूरी से ही किसी व्यक्ति की पहचान करने में सक्षम होगा.