चुनाव आयोग द्वारा गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीख़ की घोषणा न करने को लेकर सवाल उठने लगे हैं. गुरुवार को चुनाव आयोग ने केवल हिमाचल प्रदेश में चुनाव की तारीख़ का ऐलान किया था जबकि गुजरात और हिमाचल प्रदेश, दोनों राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल जनवरी 2018 में ख़त्म हो रहा है. अगर गुजरात चुनाव की भी तारीख घोषित हो जाती तो राज्य में कल से ही आदर्श आचार संहिता लग जाती और जाहिर है कि इसके बाद राज्य या केंद्र सरकार वहां किसी योजना का ऐलान नहीं कर पाते. कांग्रेस समेत विपक्ष के तमाम नेताओं ने यह बात कहते हुए चुनाव आयोग पर मोदी सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है. सोशल मीडिया पर भी इसकी गूंज है. आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता राघव चड्ढा ने ट्वीट किया है, ‘गुजरात चुनाव की घोषणा टालकर चुनाव आयोग अगर इतने खुलेआम मोदी के राजनीतिक एजेंडे के हिसाब से चल रहा है तो कल्पना कीजिए कि वह दबे-छिपे ढंग से क्या नहीं कर सकता.’

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए यहां आम लोगों ने भी कई टिप्पणियां की हैं. ट्विटर पर आरएन यादव की चुटकी है, ‘वह तो चुनाव आयोग ने साफ कर दिया कि गुजरात चुनाव को हिमाचल प्रदेश के साथ नहीं कराया जा सकता... वरना मिलीभगत या तोता जैसे शब्दों पर से मेरा भरोसा उठ गया होता.’ अभी ने पूछा है, ‘चुनाव आयोग ने गुजरात चुनाव क्यों टाला? कौन तैयार नहीं है? आयोग या भाजपा?’

इस मसले पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :

ओम थानवी | @omthanvi

बिहार चुनाव में मोदी ने सवा लाख करोड़ रुपए का लालच दिया था. गुजरात तो उनका अपना है. इज़्ज़त का भी सवाल है. आयोग इतना लिहाज़ नहीं करेगा क्या?

मोहित यादव | facebook/mohit.jadhav3

चुनाव आयोग द्वारा गुजरात में चुनाव की तिथि घोषित नहीं किए जाने से साफ है कि राज्य में विकास की हालत पतली है.

सतीश आचार्य | @satishacharya

आरुषि और हेमराज को किसने मारा?

द्वैपायन मित्रा | @DwaipayanM

भाजपा को गुजरात में चुनाव जीतने का इतना भरोसा है कि पार्टी चुनाव आयोग को चुनाव की तारीखें घोषित नहीं करने दे रही है!

मोहन रंगनाथन | facebook/Capt.MohanRanganathan

… यह शर्मिंदगी बात नहीं है? …नवंबर, 2016 में आरबीआई ने अपनी स्वायत्ता खोई थी और अब अक्टूबर 2017 में चुनाव आयोग कठपुतली बन गया है!

श्रीकांत सिंह शाही | @srikantasingh

चुनाव आयोग चाहता है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हों. लेकिन फिलहाल गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों की घोषणा एक ही दिन करने की स्थिति में नहीं है.