भारत में हवाई यात्राओं की सुरक्षा को लेकर कुछ चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ इस साल अगस्त तक भारतीय एयरलाइनों के विमानों के इंजनों में उड़ान के दौरान समस्या आने की 15 घटनाएं हुई हैं. यह संख्या बीते छह सालों में सबसे ज़्यादा है. ख़बर के मुताबिक़ दो घटनाओं में तो उड़ान भरते हुए इंजन में आग लग गई जबकि एक और मामले में विमान के इंजन का टरबाइन ब्लेड ही बाहर निकल गया. नागरिक उड्डयन महानिदेशक (डीजीसीए) के एक अधिकारी ने इन तीनों मामलों को गंभीर बताया और कहा कि इनमें कुछ भी हो सकता था. अधिकारी ने कहा कि (अगर कोई हादसा होता तो) यात्रियों के बचने की गुंजाइश कम होती.

सुरक्षा नियमों के अनुसार इंजन में गड़बड़ी की सूरत में विमानों को नज़दीकी एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी होती है. आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक़ पिछले साल भरी गईं उड़ानों में केवल सात विमानों के इंजन में गड़बड़ी की रिपोर्ट की गई थी. इस साल जिन 15 विमानों की उड़ान में गड़बड़ी हुई, उनमें से सात के इंजन अमेरिका स्थित सीएफ़एम इंटरनेशनल ने तैयार किए थे. वहीं आधा दर्जन इंजन अमेरिका की प्रैट एंड विटनी कंपनी ने बनाए थे. ये कंपनी अपने इंजनों में तकनीकी गड़बड़ी के चलते अंतरराष्ट्रीय जांच का सामना भी कर रही है. भारत में हुई गड़बड़ियों पर कंपनी के विशेषज्ञों का कहना है कि इंजनों के साथ दिक़्क़त थी लेकिन कोई गंभीर बात नहीं थी.

डीजीसीए के एक अधिकारी ने कहा कि यात्रियों के विमान में चढ़ने से पहले उसका निरीक्षण किया जाता है. उन्होंने बताया कि कई बार निरीक्षण के दौरान गड़बड़ियां देखी गई हैं. उन्होंने कहा, ‘लेकिन अगर विमान के उड़ान भरने या उतरने के समय इंजन में गड़बड़ी है तो ये गंभीर बात है.’ वहीं, सुरक्षा विशेषज्ञों ने इंजनों में गड़बड़ी को लेकर चिंता ज़ाहिर की है. एक विशेषज्ञ ने कहा कि डीजीसीए को इस तरह की जानकारियां अपनी वेबसाइट पर देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि डीजीसीए ने मामलों की जांच की है तो उसे पारदर्शिता बरतनी चाहिए.

उधर, इस मुद्दे पर डीजीसीए और विमान हादसों की जांच करने वाले ब्यूरो एएआईबी के बीच तालमेल नज़र नहीं आता. आधिकारिक दस्तावेज़ बताते हैं कि एएआईबी ने इंजन में आग लगने को गंभीर बताते हुए जांच करने की बात कही, लेकिन नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने मामलों को डीजीसीए को सौंप दिया.