प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभी 25 सितंबर को ही एक बेहद महात्वाकांक्षी ‘सौभाग्य कार्यक्रम’ शुरू किया था. प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना के तहत यह कार्यक्रम शुरू किया गया. इसके ज़रिए जैसा कि ख़ुद प्रधानमंत्री मोदी ने वादा किया था देश के चार करोड़ घरों में बिजली पहुंचाए जाने का लक्ष्य तय किया गया. लेकिन अब द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर की मानें तो प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया चार करोड़ का यह अांकड़ा ‘काल्पनिक’ था.

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के सूत्राें के मुताबिक नए अनुमान के हिसाब से नया लक्ष्य तय किया गया. इसके तहत तीन करोड़ 31 लाख के लगभग घरों में ही ‘सौभाग्य कार्यक्रम’ तहत मुफ्त बिजली कनेक्शन (मुफ्त बिजली नहीं) दिए जाएंगे. अख़बार से बातचीत में मंत्रालय के अधिकारियों ने माना कि पहले जो आंकड़ा दिया गया था वह ‘काल्पनिक’ था. जबकि अब जो नया लक्ष्य तय किया गया है वह ‘अनुमानित आंकड़े’ पर आधारित है. क्योंकि जब ज़मीनी पड़ताल की गई तो पाया गया कि एक करोड़ घरों में पहले से ही बिजली उपलब्ध है

यही नहीं सौभाग्य कार्यक्रम के पूरा होने की अंतिम तारीख़ भी बढ़ा दी गई है. पहले 31 दिसंबर 2018 तक सभी घरों में बिजली कनेक्शन पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया था. लेकिन अब यह तारीख़ 31 मार्च 2019 कर दी गई है. हालांकि इस तारीख़ तक भी नया लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा इस पर संशय है क्योंकि अब तक कार्यक्रम सिर्फ कागज़ों पर ही है. एक अधिकारी बताते हैं, ‘अभी सौभाग्य कार्यक्रम के तहत निविदा प्रक्रिया ही चल रही है. कार्यक्रम का असल क्रियान्वयन जनवरी-2018 या उसके बाद ही शुरू हो सकेगा.’

यहां बताते चलें केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए 2019 के लोकसभा चुनाव के लिहाज़ से ‘सौभाग्य कार्यक्रम’ ठीक वैसे ही मायने रखता है जैसे ‘उज्जवला योजना.’ उज्जवला योजना के तहत ग़रीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए थे. बाद में इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव पर दिखा और भाजपा में डेढ़ दशक बाद राज्य में पूर्ण बहुमत से सरकाार बनाई. विश्लेषकों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत में ‘उज्जवला योजना’ का योगदान सबसे अधिक रहा था.