उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर राज्य का भगवाकरण करने के आरोप लगते रहे हैं. इनमें एक आरोप यह भी है कि योगी आदित्यनाथ प्रदेश में हर चीज़ को भगवा रंग से रंगना चाहते हैं. शुरू में केवल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कुर्सी और तौलिये के भगवा रंग को लेकर ख़बरें आती थीं. बाद में स्कूल के बस्ते और बिजली के खंभों को भी भगवा रंग में रंगे जाने की ख़बरें आईं. हाल में सरकारी बसों पर भी भगवा रंग चढ़ा दिया गया. ख़ुद प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बसों को हरी झंडी दिखाई. आलोचक और विरोधी कहते हैं कि यह सब सरकार की भगवाकरण की नीति के तहत किया जा रहा है.

इसी मुद्दे को हवा देतीं दो तस्वीरें पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर वायरल हैं. ख़बर है कि यूपी सरकार ने अस्पतालों तक को भगवा रंग में रंगना शुरू कर दिया है. इस सिलसिले में गोरखपुर के एक अस्पताल से कथित रूप से जुड़ीं दो तस्वीरों को ख़ूब शेयर किया जा रहा है. इनमें अस्पताल के वार्ड में रखे पलंगों पर केसरिया रंग की चादरें दिख रही हैं. आप नीचे दोनों तस्वीरें देख सकते हैं.

बीते अगस्त में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीज़न की कमी की वजह से दर्जनों बच्चों की मौत हो गई थी. यह मुद्दा कई दिनों तक राष्ट्रीय मीडिया में छाया रहा और सरकार को तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा. ऊपर से राज्य में जिस तरह चीज़ों को केसरिया रंग में रंगने की कथित मुहिम चल रही है, उसे देखते हुए कई लोग इन दोनों तस्वीरें को बीआरडी मेडिकल कॉलेज का मान रहे हैं क्योंकि इनमें ‘गोरखपुर’ का ज़िक्र है.

लेकिन असल में ऐसा नहीं है. पहली तस्वीर गोरखपुर ज़िले की ज़रूर है लेकिन यह बीआरडी मेडिकल कॉलेज की नहीं है. वहां सहजनवां स्थित एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) है. इसे 2015 में शुरू किया गया था. 19 अगस्त के आसपास आई एक ख़बर के मुताबिक़ सीएचसी में स्वास्थ्य सचिव के आने की सूचना मिलने पर वहां की बेड शीटों को बदल दिया गया था. अस्पताल ने पुरानी चादरों को हटाकर नई चादरें बिछाईं जिनका रंग केसरिया था. यही बात मीडिया का ध्यान खींचने के लिए काफ़ी थी. कई ख़बरों में सीएचसी के लोगों का केसरिया रंग की चादरें बिछाना ‘सरकार की चापलूसी’ बताया गया. हालांकि उसकी तरफ़ से सफ़ाई भी दी गई कि बाज़ार में दूसरी रंग की चादरें नहीं मिल पाईं इसलिए उन्हें ‘मजबूरी’ में केसरिया रंग की चादरें बिछानी पड़ीं. सोशल मीडिया पर यह ख़बर फैल गई. लेकिन बाद में भ्रामक जानकारी के ज़रिए स्वास्थ्य केंद्र को बीआरडी मेडिकल कॉलेज बता दिया गया जो कि सही नहीं है.

अब बात दूसरी तस्वीर की. इसमें अस्पताल के एक वार्ड के पलंगों पर बच्चों को लेटा देखा जा सकता है. लेकिन यह तस्वीर भी बीआरडी मेडिकल अस्पताल की नहीं है, और न ही मौजूदा सरकार के समय की. बल्कि यह तो उत्तर प्रदेश के किसी भी अस्पताल की तस्वीर नहीं है.

इस तस्वीर का संबंध चार साल पहले बिहार में हुई एक घटना से है. 17 जुलाई, 2013 की ख़बर के मुताबिक़ बिहार के सारन ज़िले के एक स्कूल में दूषित खाना खाने की वजह से क़रीब दो दर्जन बच्चों की मौत हो गई थी और कइयों की तबीयत बुरी तरह बिगड़ गई थी. यह खाना मिड-डे मील स्कीम के तहत दिया गया था. घटना के बाद बच्चों को पटना मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में भर्ती कराया गया था. ख़बर के अगले दिन रॉयटर्स के फ़ोटोग्राफ़र अदनान अबीदी ने अस्पताल में भर्ती बच्चों की तस्वीरें ली थीं. इनमें से एक तस्वीर गोद में बच्चा लिए महिला की भी थी. आप नीचे अदनान अबीदी को वह तस्वीर देख सकते हैं.

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यानी इन दोनों तस्वीरों का गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज से कोई संबंध नहीं है. दूसरे शब्दों में कहें तो सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे दावे झूठे और भ्रामक हैं.